बीघापुर (उन्नाव)। जनपद की बीघापुर तहसील इन दिनों अवैध खनन के काले कारोबार का अभेद्य किला बनती जा रही है। विकास की आड़ में मिट्टी के अवैध उत्खनन का यह धंधा अब इस कदर पैर पसार चुका है कि इसने प्रशासनिक साख को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है। दिन-रात गरजती प्रतिबंधित मशीनें और धूल उड़ाते डंपर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहाँ नियम-कानून ताक पर रखकर धरती का सीना छलनी किया जा रहा है।
प्रशासन की नाक के नीचे ‘पीली मिट्टी’ का काला खेल
बीघापुर क्षेत्र के विभिन्न गांवों में इन दिनों जेसीबी और भारी मशीनों का शोर आम हो गया है। बिना किसी वैध परमिट और रॉयल्टी के मिट्टी का खनन धड़ल्ले से जारी है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह सारा खेल प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन ‘साहब’ मौन हैं। खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न तो पुलिस का खौफ है और न ही राजस्व विभाग की कार्रवाई का डर।
सड़कों पर रात के अंधेरे में दौड़ती ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और डंपर न केवल हादसों को दावत दे रहे हैं, बल्कि लोक निर्माण विभाग की करोड़ों की लागत से बनी सड़कों को भी तहस-नहस कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचते, जिससे यह संदेह गहराता है कि इस अवैध धंधे को सत्ता और तंत्र का मौन संरक्षण प्राप्त है।
पवन शुक्ला का सीधा प्रहार: ‘भ्रष्ट अधिकारियों और माफियाओं का गठजोड़’
अवैध खनन के इस बढ़ते जाल के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन [सावित्री] गुट के प्रदेश अध्यक्ष पवन शुक्ला ने अब मोर्चा खोल दिया है। पवन शुक्ला ने उपजिलाधिकारी (SDM) बीघापुर से मुलाकात कर उन्हें एक सख्त लहजे में प्रार्थना पत्र सौंपा है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि क्षेत्र में चल रहा यह अवैध कारोबार भू-माफिया और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा है।
”सरकार को राजस्व का भारी चूना लगाया जा रहा है। उपजाऊ जमीनों को गहरे गड्ढों में तब्दील कर किसानों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। अगर जल्द ही मशीनों को जब्त कर दोषियों पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो भारतीय किसान यूनियन सड़कों पर उतरकर ईंट से ईंट बजा देगी।”
— पवन शुक्ला, प्रदेश अध्यक्ष, भाकियू [सावित्री] गौरव
किसानों की उपजाऊ भूमि पर संकट
अवैध खनन का सबसे बुरा प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। जेसीबी मशीनों द्वारा निर्धारित सीमा से कहीं अधिक गहराई तक मिट्टी निकाली जा रही है, जिससे आसपास के खेतों की सिंचाई और उपजाऊ क्षमता प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि भविष्य में इन गड्ढों के कारण भूमि कटाव बढ़ेगा और खेती करना लगभग असंभव हो जाएगा। यह स्थिति आने वाले समय में अन्नदाताओं के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है।
उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए पवन शुक्ला ने प्रार्थना पत्र की प्रतियां जिलाधिकारी उन्नाव और मंडलायुक्त लखनऊ को भी भेजी हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि पर्दे के पीछे बैठे असली किरदारों को बेनकाब किया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय प्रशासन ने हीलाहवाली जारी रखी, तो इस मुद्दे को प्रदेश स्तर पर मुख्यमंत्री तक ले जाया जाएगा।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
बीघापुर की धरती आज न्याय की गुहार लगा रही है। एक तरफ किसान अपनी जमीन बचाने की गुहार लगा रहा है, तो दूसरी तरफ खनन माफिया अपनी जेबें भरने में व्यस्त हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इन रसूखदार माफियाओं पर नकेल कसेगा या फिर हमेशा की तरह शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
बीघापुर की जनता को अब जिलाधिकारी के हस्तक्षेप का इंतजार है। यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो किसान आंदोलन की आग पूरे जनपद में फैलना तय है।
