दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु, झूले और खजले की दुकानों ने बढ़ाया मेले का आकर्षण
उन्नाव। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जनपद के चकवा खेड़ा कैलाव स्थित प्रसिद्ध सिद्धिपीठ माँ अलोपा देवी मंदिर में इस वर्ष भी अष्टमी और नवमी के दिन भव्य मेले का आयोजन किया गया। दो दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर माँ के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।
सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के गांवों और दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुंचे। पूरे परिसर में “जय माता दी” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते नजर आए।
भव्य मेले में दिखा उत्साह और उल्लास
मंदिर परिसर के आसपास लगे मेले में इस बार भी काफी रौनक देखने को मिली। बच्चों और युवाओं के मनोरंजन के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। भिटौली, पुरवा और बटुमऊ से आए झूला संचालकों ने विभिन्न प्रकार के झूले लगाए, जिनमें मिक्की माउस झूला बच्चों के बीच खासा आकर्षण का केंद्र रहा। झूलों पर बच्चों की भीड़ पूरे दिन देखने को मिली और मेले में खुशी का माहौल बना रहा।
खजले की दुकानों पर उमड़ी भीड़
मेले में खाने-पीने की दुकानों ने भी लोगों का खूब ध्यान खींचा। खासतौर पर ‘तकिया मेले’ की तर्ज पर यहाँ बिकने वाला प्रसिद्ध ‘खजला’ श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। दूर-दूर से आए लोगों ने खजले की जमकर खरीदारी की और इसका स्वाद लिया। इसके अलावा अन्य मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों की दुकानों पर भी अच्छी-खासी भीड़ देखी गई।
स्थानीय व्यापारियों को मिला लाभ
इस मेले के आयोजन से स्थानीय व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी अच्छा कारोबार मिला। कई अस्थायी दुकानों के माध्यम से लोगों ने अपने उत्पादों की बिक्री की, जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला।
व्यवस्था में प्रशासन और समिति की अहम भूमिका
मेले को सकुशल संपन्न कराने में मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। भीड़ को नियंत्रित करने और सुचारू दर्शन व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।
गणमान्य लोगों ने भी किए दर्शन
मेले के दौरान क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने भी मंदिर पहुंचकर माँ अलोपा देवी के दर्शन किए। इनमें पासा खेड़ा के पूर्व प्रधान विनोद कुमार द्विवेदी, संतोष उर्फ पप्पू पांडेय और वरिष्ठ पत्रकार हरिकृष्ण शुक्ल प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए क्षेत्रवासियों के लिए सुख-समृद्धि की कामना की।
आस्था और परंपरा का संगम
यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को भी जीवित रखने का माध्यम है। हर वर्ष की तरह इस बार भी मेले ने लोगों को एक साथ जोड़ने और खुशी बांटने का अवसर दिया।
निष्कर्ष
चैत्र नवरात्रि के अवसर पर आयोजित यह भव्य मेला आस्था, उल्लास और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और व्यवस्थित आयोजन ने इस धार्मिक उत्सव को यादगार बना दिया।
