ब्लॉक स्तरीय कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक और समिति सदस्य शामिल, जिम्मेदारियों के प्रति किया गया जागरूक
बीघापुर (उन्नाव), 28 मार्च 2026। ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) बीघापुर में शनिवार को विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) के लिए एक दिवसीय ब्लॉक स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विकास खंड के विभिन्न विद्यालयों में गठित विद्यालय प्रबंध समितियों के अध्यक्ष, सचिव, प्रधानाध्यापक और इंचार्ज शिक्षक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एसएमसी सदस्यों को उनके कर्तव्यों और दायित्वों के प्रति जागरूक करना तथा विद्यालयों के समग्र विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना रहा। इसके साथ ही आगामी शैक्षिक सत्र में अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं का नामांकन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
विद्यालय विकास में एसएमसी की भूमिका पर जोर
कार्यशाला को संबोधित करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती शुचि गुप्ता ने कहा कि विद्यालय प्रबंध समिति शिक्षा व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो विद्यालय और समाज के बीच सेतु का कार्य करती है। उन्होंने बताया कि एसएमसी का गठन विद्यालयों के सुचारू संचालन, पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार के लिए किया जाता है।
उन्होंने समिति के सदस्यों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में एसएमसी की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है।
नामांकन बढ़ाने पर विशेष फोकस
खंड शिक्षा अधिकारी ने आगामी सत्र में नामांकन बढ़ाने के लिए सभी शिक्षकों और समिति सदस्यों को सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए और इसके लिए घर-घर संपर्क अभियान चलाने की आवश्यकता है।
उन्होंने अभिभावकों को जागरूक करने, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।
प्रतिभागियों ने साझा किए अनुभव
कार्यशाला के दौरान विभिन्न विद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उच्च प्राथमिक विद्यालय पिथईखेड़ा की एसएमसी उपाध्यक्ष नीता देवी, शिवगंज से आकांक्षा सिंह और रत्ना पांडे ने अपने विचार रखते हुए कहा कि विद्यालय और समुदाय के बीच बेहतर समन्वय से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि अभिभावकों और शिक्षकों के बीच संवाद मजबूत हो, तो बच्चों की पढ़ाई और उपस्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
संचालन और अन्य व्यवस्थाएं
कार्यक्रम का संचालन एआरपी दुर्गेश कुमार शुक्ल ने किया। इस दौरान एआरपी मनीषा और योगेश कुमार सहित अन्य शिक्षकों ने भी कार्यशाला को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में शिक्षक विश्वनाथ सिंह, राज किशोर, धीरज सिंह, विजय सिंह, गणेश शंकर गुप्ता, जितेंद्र सिंह चंदेल, शिव प्रसाद मिश्र, पवन सिंह, संजय पांडेय, संदीप शुक्ल और रजनीश सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रधानाध्यापक और शिक्षक उपस्थित रहे।
सामुदायिक सहभागिता पर दिया गया जोर
कार्यशाला में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विद्यालयों के विकास में सामुदायिक सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि स्थानीय समुदाय, अभिभावक और शिक्षक मिलकर कार्य करें, तो शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
निष्कर्ष
बीघापुर में आयोजित यह एसएमसी कार्यशाला शिक्षा की गुणवत्ता सुधार और नामांकन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों और समिति सदस्यों को नई ऊर्जा और दिशा मिली, जिससे आने वाले समय में विद्यालयों के बेहतर संचालन की उम्मीद जताई जा रही है।
