प्रोजेक्ट 17ए के तहत बना अत्याधुनिक युद्धपोत, कोलकाता के जीआरएसई में नौसेना को सौंपा गया
कोलकाता, 31 मार्च 2026। भारतीय नौसेना को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी सफलता मिली है। प्रोजेक्ट 17ए के अंतर्गत निर्मित स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘दूनागिरी’ को 30 मार्च 2026 को कोलकाता स्थित Garden Reach Shipbuilders & Engineers Limited (जीआरएसई) में औपचारिक रूप से नौसेना को सौंप दिया गया।
यह युद्धपोत नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) का पांचवां और इस श्रेणी का दूसरा प्रमुख फ्रिगेट है, जिसे अत्याधुनिक तकनीक और स्वदेशी क्षमताओं के साथ तैयार किया गया है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
‘दूनागिरी’ का निर्माण पूरी तरह भारतीय डिजाइन और तकनीक पर आधारित है, जो देश की बढ़ती जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाता है। यह प्रोजेक्ट “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
इस फ्रिगेट को भारतीय नौसेना की वर्तमान और भविष्य की समुद्री चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसकी स्टील्थ तकनीक, उन्नत हथियार प्रणाली और स्वचालन इसे आधुनिक नौसैनिक युद्ध के लिए बेहद सक्षम बनाते हैं।
उन्नत तकनीक और मारक क्षमता से लैस
‘दूनागिरी’ में कई अत्याधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम लगाए गए हैं, जिनमें सुपरसोनिक मिसाइल BrahMos, एमएफ-स्टार रडार और एमआरएसएएम कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। इसके अलावा इसमें 76 मिमी गन, क्लोज-इन वेपन सिस्टम, टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेट भी लगाए गए हैं।
यह युद्धपोत संयुक्त डीजल या गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली से लैस है, जो इसे उच्च गति और बेहतर संचालन क्षमता प्रदान करता है। साथ ही इसमें एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली (IPMS) जैसी आधुनिक तकनीकें भी शामिल हैं।
पुराने ‘दूनागिरी’ की विरासत को आगे बढ़ाता नया युद्धपोत
यह नया फ्रिगेट भारतीय नौसेना के पुराने आईएनएस दूनागिरी का आधुनिक रूप है, जिसने 1977 से 2010 तक देश की सेवा की थी। नया ‘दूनागिरी’ उसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अधिक आधुनिक और सक्षम रूप में सामने आया है।
रोजगार और उद्योग को मिला बढ़ावा
इस परियोजना में लगभग 75 प्रतिशत स्वदेशीकरण हासिल किया गया है। इसके निर्माण में 200 से अधिक एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) जुड़े रहे, जिससे प्रत्यक्ष रूप से करीब 4,000 और अप्रत्यक्ष रूप से 10,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला।
निर्माण समय में भी सुधार
पहले युद्धपोत ‘नीलगिरी’ के निर्माण में जहां 93 महीने लगे थे, वहीं ‘दूनागिरी’ का निर्माण लगभग 80 महीनों में पूरा किया गया। यह भारतीय शिपबिल्डिंग सेक्टर की बढ़ती दक्षता को दर्शाता है।
‘दूनागिरी’ की सुपुर्दगी भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा करने के साथ-साथ देश की स्वदेशी रक्षा क्षमता को भी मजबूत करती है। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण क्षेत्र में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
