कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार का बड़ा फैसला
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने हालात पर करीबी नजर रखने के लिए एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है। इस समूह की अध्यक्षता रक्षा मंत्री Rajnath Singh कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस समूह में गृह मंत्री Amit Shah, वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman और पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri समेत अन्य वरिष्ठ मंत्री भी शामिल हैं। समूह का उद्देश्य पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से जुड़े आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों की निगरानी करना है।
इसी बीच, सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती का ऐलान किया है। नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल पर उत्पाद शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
सरकार के इस फैसले के बाद तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई। Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर बढ़त के साथ खुले।
रेटिंग एजेंसी ICRA ने पहले ही संकेत दिया था कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 100-105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 14 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो सकता है। एजेंसी ने यह भी अनुमान जताया था कि कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए सरकार उत्पाद शुल्क में कटौती कर सकती है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश अपनी कच्चे तेल की लगभग 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की करीब आधी जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
मध्य पूर्व संकट के बीच सरकार का यह कदम न केवल उपभोक्ताओं को राहत देने वाला है, बल्कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
