उन्नाव। जनपद के नवाबगंज स्थित खण्ड विकास अधिकारी सभागार में पारिस्थितिक विज्ञान एवं पर्यावरण के अंतर्गत पर्यावरणीय शिक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विकास खण्डों से आए ग्राम प्रधानों एवं कृषकों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य कीटनाशकों एवं रसायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं सतत उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। इस दौरान ग्राम प्रधानों से रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. राजीव वर्मा ने प्रतिभागियों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करते हुए बताया कि अत्यधिक रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग भूमि की उर्वरता को नुकसान पहुंचाता है और पर्यावरण को भी हानि पहुंचाता है। उन्होंने गंगा किनारे बसे गांवों में हो रही जैविक खेती के उदाहरण प्रस्तुत कर जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
जिला कृषि अधिकारी उन्नाव ने भी किसानों को गौ आधारित प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, दशपर्णीय अर्क एवं नीम ऑयल जैसे विकल्पों के उपयोग की जानकारी देते हुए कहा कि इससे खेती की लागत घटती है और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है।
कार्यक्रम के अंतर्गत नवाबगंज स्थित गौशाला में जीवामृत बनाने का प्रदर्शन किया गया। साथ ही वर्मीकम्पोस्ट, गोबर से बनने वाले पेंट तथा एजोला के उपयोग के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के समापन पर ग्राम प्रधानों एवं किसानों ने जैविक खेती को अपनाने और अपने क्षेत्रों में इसके प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया।
