उन्नाव/भगवंतनगर। जनपद का सुप्रसिद्ध सिद्धपीठ पावन चंद्रिका देवी तट चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर ‘लघु काशी’ के रूप में जीवंत हो उठा। वाराणसी की तर्ज पर आयोजित भव्य ‘महागंगा आरती’ ने न केवल तट को दीपों की रोशनी से सराबोर कर दिया, बल्कि हज़ारों श्रद्धालुओं को भक्ति के चरम आनंद से सराबोर कर दिया।
शिव-शक्ति के नृत्य ने बांधा समां
इस वर्ष के आयोजन का मुख्य आकर्षण भगवान शिव और माता पार्वती के स्वरूपों द्वारा प्रस्तुत विहंगम नृत्य रहा। दीपों की झिलमिलाहट के बीच जब डमरू की थाप और बांसुरी की मधुर तान गूँजी, तो कलाकारों की लयबद्ध प्रस्तुति देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा।
वाराणसी जैसी भव्यता और वैदिक मंत्रोच्चार
प्रशिक्षित अर्चकों द्वारा जब विशाल दीप-स्तंभों के साथ गंगा मैया की आरती शुरू की गई, तो दृश्य बिल्कुल काशी के घाटों जैसा प्रतीत होने लगा। शंखध्वनि और वैदिक ऋचाओं के बीच हुई इस आरती ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्थानीय निवासियों का कहना था कि अब उन्हें आध्यात्मिक शांति और बनारस जैसी अनुभूति के लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं है।
“गंगा की स्वच्छता और आध्यात्मिकता का संगम”
कार्यक्रम के संयोजक और प्रतिष्ठित युवा समाजसेवी अनुराग त्रिवेदी ने बताया:
”हमारा लक्ष्य पावन चंद्रिका देवी तट की महिमा को विश्व पटल पर स्थापित करना है। इस आयोजन के माध्यम से हम क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना जगाने के साथ-साथ गंगा की अविरलता और स्वच्छता का संदेश जन-जन तक पहुँचाना चाहते हैं।”
प्रमुख हस्तियों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद (अवध प्रांत) के प्रांत संगठन मंत्री विजय प्रताप ने काशी और अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत पर जोर देते हुए कहा, “बटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे।”
इस भव्य आयोजन के साक्षी बने प्रमुख व्यक्तित्व:
- मीडिया जगत: वरिष्ठ पत्रकार हरिकृष्ण शुक्ल, मंडल ब्यूरो चीफ हिमांशू शुक्ल, प्रिंशू शुक्ला (लखनऊ), पीयूष त्रिवेदी, अखिलेंद्र तिवारी, उदयपाल, और देवा उर्फ देवेंद्र सिंह।
- सहयोगी: पप्पू त्रिवेदी, रानू त्रिवेदी, नितिन त्रिवेदी, दीनू त्रिवेदी, भोला त्रिवेदी, बटनलाल शुक्ला, टिंकू पण्डित, सुंदर रावत, शिवकुमार शर्मा और मुन्ना द्विवेदी सहित हजारों की संख्या में भक्तगण।
