नई दिल्ली, 25 मार्च 2026। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव को लेकर बुधवार को संसद परिसर में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक काफी हंगामेदार रही। बैठक में एक ओर सरकार ने भारत का स्पष्ट रुख रखते हुए पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला, वहीं विपक्ष ने सरकार की विदेश नीति को ‘असंतोषजनक’ करार दिया।
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई फोन वार्ता का भी जिक्र किया गया। सरकार ने बताया कि पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को तुरंत समाप्त करने पर जोर दिया है और कहा है कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था व मानवता को गंभीर नुकसान हो रहा है।
🔥 पाकिस्तान पर ‘दलाल राष्ट्र’ वाला बयान बना चर्चा का केंद्र
बैठक का सबसे चर्चित पहलू तब सामने आया जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका को सिरे से खारिज करते हुए उसे “दलाल राष्ट्र” बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का दशकों से अमेरिका द्वारा केवल “इस्तेमाल” किया जाता रहा है और भारत स्वतंत्र व ठोस नीति पर काम करता है।
यह बयान विपक्ष के उस आरोप के जवाब में आया, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान जैसे कमजोर देश को मध्यस्थता का मौका मिल रहा है, जबकि भारत मूकदर्शक बना हुआ है।
🏛️ विपक्ष का सरकार पर हमला
कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने बैठक के बाद कहा कि सरकार का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं रहा और इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी लोकसभा और राज्यसभा में नियमों के तहत चर्चा की मांग दोहराई।
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर समय पर प्रतिक्रिया नहीं दी, जो नैतिक रूप से कमजोर स्थिति दर्शाता है।
🇮🇳 सरकार का जवाब और प्राथमिकताएं
सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि बैठक में विपक्ष को पूरी जानकारी दी गई है और संकट की इस घड़ी में सभी दल सरकार के साथ खड़े हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता खाड़ी क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है, और इस दिशा में अब तक स्थिति नियंत्रण में है।
👥 बैठक में कौन-कौन रहे शामिल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा समेत कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए।
वहीं विपक्ष की ओर से सुप्रिया सुले, मुकुल वासनिक और अन्य दलों के नेता मौजूद रहे, हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने बैठक से दूरी बनाई।
👉 कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया संकट पर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद साफ नजर आए, और अब इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग तेज हो गई है।
