पाटन/उन्नाव। बिहार थाना क्षेत्र के बीघापुर तहसील अंतर्गत तकिया रेलवे स्टेशन के पास लकड़ी माफियाओं ने दुस्साहस का परिचय देते हुए पर्यावरण को भारी क्षति पहुँचाई है। बेखौफ लकड़कट्टों ने स्टेशन के समीप स्थित एक हरे-भरे फलदार जामुन के साथ-साथ एक विशालकाय नीम के पेड़ को भी मशीनी आरे से काटकर धराशायी कर दिया।
दो बेशकीमती पेड़ों पर चला आरा
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लकड़कट्टे पूरी तैयारी के साथ आए थे और उन्होंने स्टेशन से चंद कदमों की दूरी पर स्थित इन दोनों पेड़ों को अपना निशाना बनाया। जहाँ जामुन का पेड़ फलदार और छायादार था, वहीं दशकों पुराना नीम का पेड़ औषधीय और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था। इन दोनों पेड़ों के कटान से स्थानीय पारिस्थितिकी को अपूरणीय क्षति हुई है।
पुलिस और वन विभाग की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न
रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक और व्यस्त स्थान के पास दिनदहाड़े मशीनयुक्त आरे चलते रहे, लेकिन वन विभाग और स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। इस घटना ने प्रशासन की मुस्तैदी पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं:
- क्या माफियाओं को स्थानीय तंत्र का संरक्षण प्राप्त है?
- इतने बड़े स्तर पर हो रहे अवैध कटान की सूचना वन रक्षकों को क्यों नहीं मिली?
कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के नागरिकों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ सरकार वृक्षारोपण के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर माफिया पुराने पेड़ों का अस्तित्व खत्म कर रहे हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि मौके की जांच कर दोषियों पर कठोरतम विधिक कार्रवाई की जाए।
“नीम और जामुन जैसे पेड़ों का कटना पर्यावरण के साथ अपराध है। प्रशासन की नाक के नीचे मशीनों से पेड़ों का कत्लेआम होना बेहद चिंताजनक है।” — क्षेत्रीय निवासी
ब्यूरो रिपोर्ट: [RUDRA YUKTI NEWS]
