लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को लखनऊ में पुलिस विभाग की विभिन्न इकाइयों की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में यूपी पुलिस में 81,000 से अधिक पदों पर भर्ती की जाएगी। यह कदम न केवल प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस को एक सक्षम, ऊर्जावान और तकनीकी रूप से उन्नत बल के रूप में स्थापित करेगा।
भर्ती प्रक्रिया में शुचिता और पारदर्शिता पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आगामी भर्तियों में मेरिट और आरक्षण नियमावली का कड़ाई से पालन किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया में शुचिता, पारदर्शिता और समयबद्धता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। सीएम का लक्ष्य एक ऐसी प्रणाली विकसित करना है जिससे योग्य युवाओं को बिना किसी बाधा के पुलिस बल का हिस्सा बनने का अवसर मिले।
PRV-112: अब और कम होगा रिस्पॉन्स टाइम
प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं को धार देते हुए मुख्यमंत्री ने PRV-112 सेवा की कार्यप्रणाली की समीक्षा की। वर्तमान में यूपी पुलिस का औसत रिस्पॉन्स टाइम लगभग 6 मिनट है, जिसे और कम करने के निर्देश दिए गए हैं।
- रणनीतिक तैनाती: पीआरवी वाहनों की लोकेशन को ‘स्ट्रेटजिक’ तरीके से तय किया जाएगा।
- सतत मूवमेंट: वाहनों का निरंतर मूवमेंट सुनिश्चित होगा ताकि अपराधियों में भय और आम जनता में सुरक्षा का भाव पैदा हो।
कार्यप्रणाली में बदलाव: लंबे समय से जमे पुलिसकर्मियों का होगा तबादला
प्रशासनिक पारदर्शिता को नई ऊर्जा देने के लिए मुख्यमंत्री ने एक कड़ा फैसला लिया है। राजधानी लखनऊ के महत्वपूर्ण स्थलों जैसे जन भवन, मुख्यमंत्री आवास और पुलिस मुख्यालय में लंबे समय से तैनात पुलिस कर्मियों के स्थानांतरण के निर्देश दिए गए हैं। सीएम का मानना है कि इससे कार्यप्रणाली में नयापन आएगा और जवाबदेही बढ़ेगी।
फायर ब्रिगेड और तकनीकी सुदृढ़ीकरण
मुख्यमंत्री ने ‘सेफ सिटी’ के संकल्प को दोहराते हुए ‘एक तहसील-एक फायर टेंडर’ की परिकल्पना को धरातल पर उतारने के निर्देश दिए।
- हाइड्रोलिक फायर टेंडर: हर जनपद में इनकी उपलब्धता अनिवार्य होगी।
- फायर स्टेशन: सभी तहसीलों में आधुनिक फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
- डिजिटल पुलिस: पुलिस रेडियो में ई-ऑफिस लागू कर सभी 75 जनपदों में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
जेल सुधार और नागरिक सुरक्षा
सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने जेलों में कैदियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराने के लिए तकनीकी ढांचा दुरुस्त करने को कहा है। इसके साथ ही, जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से 7,500 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
”हमारी सरकार उत्तर प्रदेश को देश का सबसे सुरक्षित प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पुलिस बल का आधुनिकीकरण और युवाओं को पर्याप्त रोजगार के अवसर प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है।” – योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री के इन निर्देशों से स्पष्ट है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश पुलिस न केवल संख्या बल में बड़ी होगी, बल्कि तकनीक और कार्यक्षमता के मामले में भी देश के लिए एक रोल मॉडल बनेगी।
