अयोध्या: बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के पूर्व याचिकाकर्ता और अयोध्या के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता इकबाल अंसारी ने सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी अपील की है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से आह्वान किया है कि आगामी ईद-उल-अधा (बकरीद) के त्योहार के दौरान गाय की कुर्बानी न करें। इसके साथ ही, उन्होंने सरकार से गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु और राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने का औपचारिक अनुरोध भी किया है, ताकि गाय से जुड़ी हिंसा और मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या) जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
धार्मिक और संवैधानिक नियमों का हवाला
इकबाल अंसारी ने अपनी इस अपील के समर्थन में धार्मिक और कानूनी दोनों पहलुओं को सामने रखा है। उनका कहना है कि गाय की हत्या इस्लामी शिक्षाओं और भारतीय संविधान दोनों के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान भी इसकी मनाही करता है और इस्लामी शिक्षाओं में भी सदियों पहले इसकी निंदा की जा चुकी है।
हदीस साहित्य का हवाला देते हुए अंसारी ने कहा:
”पैगंबर मुहम्मद ने गाय के दूध को अत्यधिक लाभकारी और उसके घी को औषधि (दवा) बताया है, जबकि उसके मांस के सेवन से परहेज करने की बात कही है। सच्ची देशभक्ति का अर्थ यही है कि हम देश के कानूनों और अपने पड़ोसियों के धर्म व भावनाओं का पूरा सम्मान करें। जो लोग कानून का पालन करते हैं, वही सच्चे देशभक्त हैं।”
संतों को भेंट कीं गाय की मूर्तियाँ
आपसी सम्मान और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने के लिए इकबाल अंसारी ने हाल ही में अयोध्या के कई प्रमुख संतों और धर्मगुरुओं से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने संतों को कलात्मक गाय की मूर्तियाँ भी भेंट कीं।
त्योहार से ठीक पहले अंसारी की इस अनूठी पहल और अपील ने देश भर में पशु संरक्षण, धार्मिक परंपराओं और आपसी सद्भाव को लेकर एक सकारात्मक बहस छेड़ दी है।
