लखनऊ। Yogi Adityanath ने सोमवार को राज्य कर विभाग के शासन, मुख्यालय एवं फील्ड स्तरीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर राजस्व संग्रह, कर प्रशासन और व्यापारिक सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि राज्य कर विभाग को केवल राजस्व वृद्धि तक सीमित न रहकर “विश्वास आधारित प्रशासन” का मॉडल प्रस्तुत करना होगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि ईमानदार व्यापारियों को सुविधा, सम्मान और त्वरित समाधान मिलना चाहिए। उन्होंने जीएसटी पंजीयन, रिटर्न दाखिले, अपील निस्तारण एवं रिफंड प्रक्रियाओं में अनावश्यक विलंब समाप्त करने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों को निर्देशित किया कि व्यापारियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने जोनवार अधिकारियों से सीधा संवाद कर उनके कार्य प्रदर्शन की समीक्षा की। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं फील्ड में उतरकर व्यापारियों से संवाद करने तथा कम प्रदर्शन वाले जोनों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
बैठक में जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश को जीएसटी एवं वैट मद में ₹1,15,977 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। वहीं जीएसटी बकाया के रूप में ₹2,658 करोड़ तथा प्रवर्तन इकाइयों के माध्यम से ₹2,071 करोड़ की वसूली की गई। अधिकारियों ने बताया कि 21.82 लाख सक्रिय करदाताओं के साथ उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक जीएसटी करदाताओं वाला राज्य बन गया है।
मुख्यमंत्री ने फर्जी फर्मों, कर चोरी एवं बोगस बिलिंग के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रखने के निर्देश देते हुए कहा कि तकनीक, डेटा एनालिटिक्स एवं एआई आधारित विश्लेषण का अधिकतम उपयोग कर पारदर्शी एवं जवाबदेह कर प्रशासन सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में यह भी बताया गया कि वर्ष 2025-26 में जीएसटी एवं वैट से संबंधित कुल 63,797 अपीलों का निस्तारण किया गया। मुख्यमंत्री ने लंबित अपीलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश देते हुए कहा कि रिफंड व्यवस्था को और अधिक त्वरित एवं पारदर्शी बनाया जाए, ताकि व्यापारियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित न हो।
