पाटन (उन्नाव)। तहसील बीघापुर क्षेत्र के विकासखंड सुमेरपुर अंतर्गत ग्राम मनिकापुर में करीब 20 वर्ष पूर्व निर्मित छह बाजार शेड आज खस्ताहाल होकर लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। शेड की छतों से सीमेंट और प्लास्टर लगातार झड़ रहा है, पिलरों का प्लास्टर उखड़ चुका है और अंदर लगी लोहे की सरिया बाहर झांक रही हैं। इसके बावजूद न तो स्थानीय ग्राम पंचायत ने इसकी सुध ली और न ही संबंधित विभाग के अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कदम उठाया है।
ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि जब बाजार शेड की बदहाली खुलेआम दिखाई दे रही है, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की नजर इस ओर क्यों नहीं पड़ी? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेगा?
सैकड़ों जिंदगियां दांव पर, जर्जर छत के नीचे धड़कता है बाजार
मनिकापुर बाजार में सैकड़ों लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। सब्जी, गल्ला, परचून समेत अन्य आवश्यक वस्तुओं की दुकानों का संचालन इसी जर्जर शेड के नीचे होता है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि कई स्थानों पर छत में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और छत का एक बड़ा हिस्सा कभी भी भरभराकर गिर सकता है। आने वाले बरसात के मौसम को देखते हुए दुकानदारों और ग्राहकों में डर का माहौल है, क्योंकि बारिश में खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
शिकायतों के बाद भी ढाक के तीन पात, जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी
स्थानीय दुकानदार शारदा गुप्ता, मोहित गुप्ता, बीरेंद्र गुप्ता, राकेश कुशवाहा, अशोक गुप्ता, मुन्नू कुशवाहा, संतोष चौरसिया, इस्लाम कुजरा और मेखई अहमद समेत अन्य व्यापारियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि बाजार शेड की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान और जिम्मेदार अधिकारियों की घोर उदासीनता के कारण आम जनता की जान जोखिम में पड़ रही है। यदि समय रहते इन शेड्स की मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया, तो किसी भी दिन कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है।
विकास के दावों की खुली पोल, उठ रहे गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ जहां सरकार और प्रशासन ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं मनिकापुर का यह बाजार शेड सरकारी दावों और व्यवस्थाओं की पोल खोल रहा है। सवाल यह उठता है कि आखिर लोगों की सुरक्षा से जुड़े इस अत्यंत गंभीर मुद्दे पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या प्रशासन को किसी जनहानि का इंतजार है?
जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
क्षेत्रीय ग्रामीणों और पीड़ित व्यापारियों ने जिला प्रशासन से तत्काल इस मामले का संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि मौके पर तकनीकी टीम भेजकर जांच कराई जाए और जर्जर हो चुके शेड को ध्वस्त कर वहां नए सिरे से निर्माण कराया जाए या फिर व्यापक मरम्मत कराई जाए। लोगों का साफ कहना है कि हादसे के बाद मुआवजा बांटने या कार्रवाई की औपचारिकता पूरी करने से बेहतर है कि समय रहते लोगों की जान बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं
