
उन्नाव। जिले में कई स्लाटर हाउस प्रशासनिक अनियमितताओं और नियमों की अवहेलना के चलते स्वास्थ्य संकट को न्योता दे रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद मांस प्रसंस्करण इकाइयाँ मवेशियों के अपशिष्टों का खुला परिवहन और निस्तारण कर रही हैं, जिससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
नियमों की धज्जियां
जिले के दही औद्योगिक क्षेत्र में संचालित सात बड़े स्लाटर हाउसों को अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण सुरक्षा और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था के मानक तय हैं। इनका पालन करना अनिवार्य है। लेकिन अधिकांश इकाइयाँ खुले ट्रैक्टर-ट्राली से अपशिष्ट ढो रही हैं। रास्ते में गिरने वाले अवशेष आवारा पशुओं और पक्षियों द्वारा खाए जाते हैं, जिससे गंभीर संक्रमण फैलने की आशंका है।
खुले में निस्तारण से गंभीर प्रदूषण
दही चौकी, रायपुर बुर्जुग, चांदपुर, ओरहर, तुर्कमाननगर, झंझरी, टीकरगढ़ी, बिचपरी और साहबखेड़ा के ग्रामीण सबसे अधिक प्रभावित हैं। स्लाटर हाउस से निकलने वाला अपशिष्ट खेतों और खाली जगहों पर फेंक दिया जाता है, जिससे मिट्टी और जल स्रोत दूषित हो रहे हैं। वायु प्रदूषण और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
स्वास्थ्य पर असर
स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन क्षेत्रों में रहने वाली लगभग 1.5 लाख की आबादी संक्रमण के जोखिम में है। खुले में फेंके गए अपशिष्ट से एंथ्रेक्स, ब्रूसेलोसिस, टीबी, साल्मोनेलोसिस और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी घातक बीमारियाँ फैल सकती हैं।
ग्रामीणों और विशेषज्ञों की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना अपशिष्ट से निकलती बदबू और कीटों की भरमार से स्वास्थ्य खतरा लगातार बढ़ रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि स्लाटर हाउसों में सुधार नहीं हुआ, तो यह केवल स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि भूजल और पर्यावरण को भी प्रभावित करेगा।
प्रशासन का कहना
क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी शशि बिंदकर ने बताया कि सभी स्लाटर हाउस संचालकों को अपशिष्ट बंद वाहनों में ले जाने और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीण और सामाजिक संगठन चाहते हैं कि प्रशासन स्लाटर हाउसों पर कड़ी निगरानी रखे, उल्लंघन करने वाले लाइसेंस रद्द करें और जिले में अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र स्थापित कर सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करे।
