नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक साथ नजर आई तस्वीर ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खासा ध्यान आकर्षित किया है। तस्वीर में तीनों नेता एक-दूसरे का हाथ थामे दिखाई दे रहे हैं। इसे भारत की सक्रिय और संतुलित विदेश नीति तथा बहुपक्षीय मंचों पर बढ़ती भूमिका के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS सम्मेलन के दौरान हुई विभिन्न उच्चस्तरीय मुलाकातों और संवाद की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। एक तस्वीर में मोदी शी जिनपिंग, व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ दिखाई दिए। वहीं, एक अन्य तस्वीर में उन्होंने शी, पुतिन और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ बातचीत की। एक तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ चलते हुए नजर आए।
इन तस्वीरों ने सम्मेलन के दौरान भारत की कूटनीतिक सक्रियता को रेखांकित किया है। BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर भारत एक ओर रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ा रहा है, वहीं चीन के साथ संवाद और आर्थिक रिश्तों में सुधार की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है।
पुतिन के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बातचीत में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति की समीक्षा की गई। व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, बुनियादी ढांचे और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
दोनों पक्षों ने आर्थिक संबंधों को और गति देने के लिए प्रस्तावित ‘इकोनॉमिक कोऑपरेशन प्रोग्राम 2030’ सहित विभिन्न पहलों पर भी विचार किया। मोदी और पुतिन ने ‘इनोप्रोम इंडिया’ प्रदर्शनी का दौरा कर औद्योगिक एवं व्यापारिक सहयोग की संभावनाओं को भी देखा।
शी जिनपिंग की मौजूदगी से बढ़ा सम्मेलन का महत्व
BRICS सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने भी भारत-चीन संबंधों के लिहाज से आयोजन को महत्वपूर्ण बना दिया। लंबे अंतराल के बाद शी जिनपिंग की भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
हाल के समय में भारत और चीन के बीच संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दिए हैं। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की बहाली और आर्थिक गतिविधियों को सामान्य बनाने की दिशा में हुई पहल ने भी द्विपक्षीय संबंधों को लेकर नई संभावनाएं पैदा की हैं।
ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर भारत का जोर
18वें BRICS सम्मेलन में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और विकासशील देशों की वैश्विक संस्थाओं में बेहतर भागीदारी जैसे विषय प्रमुख रहे। भारत लंबे समय से ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक मजबूती से उठाने की वकालत करता रहा है।
भारत की BRICS अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन को इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि नई दिल्ली ने अलग-अलग रणनीतिक हित रखने वाले देशों के बीच संवाद का मंच उपलब्ध कराया है।
मोदी, शी और पुतिन की साथ दिखाई दे रही तस्वीर इसी व्यापक कूटनीतिक गतिविधि की एक झलक है। रूस और चीन के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखते हुए भारत बहुपक्षीय मंचों पर अपनी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में BRICS सम्मेलन भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका और ‘ग्लोबल साउथ’ के मुद्दों पर उसके बढ़ते प्रभाव को प्रदर्शित करने वाला महत्वपूर्ण अवसर बनकर सामने आया है।
