न्यूयॉर्क। स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट का करीब 4 टन वजनी और स्कूल बस के आकार का ऊपरी हिस्सा लगभग 19 महीने तक अंतरिक्ष में अनियंत्रित रूप से घूमने के बाद चंद्रमा से टकरा गया। वैज्ञानिकों के अनुसार यह टक्कर चंद्रमा के पश्चिमी हिस्से में स्थित आइंस्टीन क्रेटर के आसपास करीब 8,700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हुई होने का अनुमान है। हालांकि इस घटना की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है और अंतिम निष्कर्ष चंद्रमा की नई तस्वीरों के विश्लेषण के बाद ही सामने आएगा।
जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2025 में दो चंद्र लैंडर को अंतरिक्ष में भेजने के बाद फाल्कन-9 रॉकेट का ऊपरी चरण पृथ्वी पर वापस नहीं लौट सका था। निचला हिस्सा सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आया, जबकि ऊपरी चरण अंतरिक्ष में अनियंत्रित होकर अपनी कक्षा बदलता रहा। सूर्य की गतिविधियों तथा पृथ्वी और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव के कारण अंततः उसका रास्ता चंद्रमा की ओर मुड़ गया और वह उसकी सतह से टकरा गया।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस घटना से पृथ्वी को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। हालांकि टक्कर के कारण चंद्रमा की सतह पर एक नया गड्ढा (क्रेटर) बनने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल ऐसा कोई अंतरिक्ष यान उस स्थान के ऊपर मौजूद नहीं था, जो टक्कर का प्रत्यक्ष दृश्य रिकॉर्ड कर सके। अब चंद्रमा की कक्षा में मौजूद ऑर्बिटर जब उस क्षेत्र के ऊपर से गुजरेंगे, तब ली गई उच्च-रिजॉल्यूशन तस्वीरों से यह स्पष्ट होगा कि वहां नया क्रेटर बना है या नहीं।
घटना के बाद स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर एक एआई आधारित वीडियो साझा किया, जिसमें संभावित टक्कर का दृश्य दिखाया गया है। हालांकि यह वास्तविक फुटेज नहीं है, क्योंकि टक्कर की प्रत्यक्ष रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं हो सकी।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
चंद्रमा से मानव निर्मित यानों के टकराने की घटनाएं नई नहीं हैं। वर्ष 1959 में सोवियत संघ का लूना-2 चंद्रमा तक पहुंचने वाला पहला मानव निर्मित यान बना था। इसके बाद अपोलो मिशनों के दौरान वैज्ञानिक अनुसंधान के उद्देश्य से कई रॉकेट चरणों को जानबूझकर चंद्रमा से टकराया गया। वर्ष 2009 में भी एक वैज्ञानिक मिशन के तहत रॉकेट चरण को चंद्रमा पर गिराया गया था।
हाल के वर्षों में भी कई दुर्घटनाएं हुई हैं। 2019 में भारत का चंद्रयान-2 लैंडर और इजराइल का बेरेशीट लैंडर दुर्घटनाग्रस्त हुए। 2022 में एक चीनी रॉकेट का हिस्सा चंद्रमा से टकराया, जबकि 2023 में रूस का लूना-25 मिशन भी चंद्रमा की सतह से टकराकर नष्ट हो गया।
बढ़ रही है अंतरिक्ष मलबे की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष में बढ़ता मलबा भविष्य के अभियानों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के अनुसार जुलाई 2026 के अंत तक पृथ्वी की कक्षा में 45 हजार से अधिक ट्रैक किए जा सकने वाले अंतरिक्ष मलबे के टुकड़े मौजूद थे, जिनका कुल वजन लगभग 17 हजार टन है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में ऐसे अनियंत्रित मलबे की निगरानी और सुरक्षित प्रबंधन अंतरिक्ष एजेंसियों की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
