शनिवार शाम 5 बजे तक महिलाओं और सहयात्रियों को जारी हुए करीब 80 लाख शून्य शुल्क टिकट, रात 12 बजे तक जारी रहेगी सुविधा
वैष्णवी राजपूत
लखनऊ। रक्षाबंधन पर्व पर योगी सरकार की ओर से महिलाओं और उनके सहयात्रियों को दी गई निशुल्क बस यात्रा सुविधा का प्रदेशभर में बड़े स्तर पर लाभ लिया गया। शनिवार शाम 5 बजे तक करीब 80 लाख महिलाएं और सहयात्री बिना किराया दिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों से यात्रा कर चुके थे। निशुल्क यात्रा की सुविधा शनिवार रात 12 बजे तक जारी रहेगी, जिसके बाद अंतिम आंकड़े सामने आने की उम्मीद है।
परिवहन निगम के अनुसार, 27 अगस्त को 9.26 लाख से अधिक महिलाओं और सहयात्रियों ने निशुल्क यात्रा की। इनमें 6.03 लाख से अधिक महिलाएं और 3.22 लाख से ज्यादा सहयात्री शामिल रहे।
वहीं 28 अगस्त यानी रक्षाबंधन के दिन 49.96 लाख से अधिक शून्य शुल्क टिकट जारी किए गए। इनमें 32.47 लाख से अधिक महिलाएं और 17.48 लाख से ज्यादा सहयात्री शामिल थे। इस तरह 27 और 28 अगस्त के उपलब्ध आंकड़ों को मिलाकर दो दिनों में 59.23 लाख से अधिक निशुल्क टिकट जारी किए जा चुके थे।
बुजुर्ग महिलाओं को भी मिली निशुल्क यात्रा की सुविधा
शुक्रवार से ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना’ के तहत 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं को भी परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलनी शुरू हुई। पात्र बुजुर्ग महिलाओं को शून्य शुल्क टिकट जारी किए जा रहे हैं। इससे रक्षाबंधन पर आवागमन करने वाली बुजुर्ग महिलाओं को भी आर्थिक राहत मिली।
परिवहन निगम की ओर से योजना का प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक पात्र महिलाएं इसका लाभ उठा सकें।
यात्रियों की भीड़ को देखते हुए बढ़ाई गई व्यवस्थाएं
यूपीएसआरटीसी प्रधान महाप्रबंधक (संचालन) अनिल कुमार ने बताया कि रक्षाबंधन पर यात्रियों की संभावित भीड़ को देखते हुए परिवहन निगम ने पहले से व्यापक तैयारियां की थीं। अधिक से अधिक बसों का संचालन, प्रमुख बस स्टेशनों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और यात्रियों की सुविधा पर विशेष निगरानी रखी गई।
अधिकारियों और कर्मचारियों को भीड़ को व्यवस्थित करने, बसों के संचालन और यात्रियों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई।
परिवहन निगम के मुताबिक तीन दिवसीय निशुल्क यात्रा के अंतिम आंकड़े शनिवार रात 12 बजे तक जारी हुए शून्य शुल्क टिकटों के सभी इनपुट अपडेट होने के बाद सामने आएंगे। ऐसे में लाभार्थियों की संख्या 80 लाख से भी आगे बढ़ने की संभावना है।
