पाटन, उन्नाव। तहसील बीघापुर क्षेत्र के पावर हाउस भाटनखेड़ा (बिहार) के अंतर्गत परसंडा गांव के चौराहे पर बुधवार देर शाम बिजली विभाग की लापरवाही का खतरनाक नमूना सामने आया। जर्जर बिजली का खंभा चलती विद्युत लाइन के दौरान अचानक जमीन पर भरभराकर गिर पड़ा। संयोग से उसी समय वहां से गुजर रहा एक राहगीर इसकी चपेट में आने से बाल-बाल बच गया। घटना ने ग्रामीणों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि जर्जर खंभे, टूटे-फूटे तार और पेड़ के सहारे चल रही एलटी लाइन की शिकायत करीब दो माह से लगातार की जा रही थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार करता नजर आ रहा है।
ग्रामीण घनश्याम लोधी के मुताबिक क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं। उन्होंने करीब दो माह पहले अधिशासी अभियंता से शिकायत कर जर्जर खंभे और पेड़ के सहारे संचालित एलटी लाइन की जानकारी दी थी। इसके बावजूद अब तक व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई।
ग्रामीणों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि इस लाइन के लिए विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए नए तार कथित रूप से बेच दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।
50 से ज्यादा जोड़ वाली लाइन, आए दिन टूटते हैं तार
उपभोक्ता राजेंद्र कुमार लोधी ने आरोप लगाया कि जर्जर एलटी लाइन में करीब 50 से अधिक जोड़ लगे हुए हैं। तार आए दिन टूटकर गिरते रहते हैं। ऐसे में कभी भी करंट की चपेट में आकर बड़ा हादसा हो सकता है। उनका कहना है कि जेई को भी करीब दो माह से लगातार समस्या की जानकारी दी जा रही है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्र के लोग लंबे समय से लो-वोल्टेज की समस्या भी झेल रहे हैं।
पेड़ से बांधकर चल रही थी बिजली लाइन, तभी गिर पड़ा खंभा
ग्रामीणों के अनुसार बुधवार को परसंडा चौराहे पर तिरछे खड़े खंभे को पेड़ से बांधकर किसी तरह बिजली लाइन चालू कराई गई थी। इसी दौरान ग्रामीणों, उपभोक्ताओं और लाइनमैन सोनू की मौजूदगी में जर्जर खंभा अचानक जमीन पर गिर पड़ा। गनीमत रही कि उस समय कोई व्यक्ति खंभे या तार की चपेट में नहीं आया, वरना घटना जानलेवा साबित हो सकती थी।
लाइनमैन ने दी थी जेई को सूचना
लाइनमैन सोनू ने बताया कि उन्होंने जर्जर लाइन और खराब खंभे की जानकारी जेई को दी थी। वहीं जेई का कहना है कि परसंडा गांव के लिए दो नए खंभे आवंटित हैं, जो पावर हाउस में पड़े हुए हैं।
इस जवाब ने ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ा दिया है। ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि जब विभाग के पास नए खंभे उपलब्ध हैं तो उन्हें मौके पर लगाकर जानलेवा बनी बिजली व्यवस्था को दुरुस्त क्यों नहीं किया गया?
‘हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?’
ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने, तत्काल नए खंभे और तार लगवाने तथा कथित तौर पर नए तारों के गबन अथवा बिक्री के आरोपों की भी जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
राजेंद्र कुमार, रमेश कुमार, सुरेंद्र कुमार, घनश्याम लोधी, कमलेश, संतोष कुमार, हरकिशोर, रूपरानी, संजय, आकाश चौधरी, विमलेश अवस्थी, रामनरेश, राहुल, संजीत और प्रेम शंकर समेत ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बिजली व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की लापरवाही से यदि भविष्य में कोई जनहानि होती है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? चलती लाइन में खंभा गिरने की घटना ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
