लखनऊ/उन्नाव। उन्नाव जनपद की बीघापुर तहसील क्षेत्र के सरकारी गल्ले की दुकानों के विक्रेताओं (कोटेदारों) का एक प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता हृदयनारायण दीक्षित से लखनऊ स्थित दारुलशफा आवास पर मिला। प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र के कोटेदारों की लंबे समय से लंबित विभिन्न समस्याओं, आर्थिक परेशानियों और विभागीय स्तर पर सामने आ रही दिक्कतों को विस्तारपूर्वक उनके सामने रखा। कोटेदारों ने समस्याओं के समाधान के लिए शासन स्तर पर प्रभावी पैरवी किए जाने की मांग की।
लाभांश बढ़ाने के आश्वासन का कोटेदारों ने जताया आभार
प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले सरकारी राशन की दुकानों से जुड़े कोटेदारों के लाभांश का मुद्दा उठाया। कोटेदारों ने बताया कि पूर्व में उन्हें 90 रुपये प्रति क्विंटल लाभांश मिलता था। हाल में राज्य सरकार की ओर से 25 पैसे तथा केंद्र सरकार की ओर से 10 पैसे की वृद्धि की गई है। इस प्रकार कुल 35 पैसे की वृद्धि हुई है।
कोटेदारों ने बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से लाभांश में 25 पैसे की अतिरिक्त वृद्धि का आश्वासन दिया गया है। प्रतिनिधिमंडल ने इस पहल का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। कोटेदारों का कहना था कि लगातार बढ़ती महंगाई, दुकान संचालन के खर्च, कर्मचारियों एवं अन्य व्यवस्थाओं के कारण वर्तमान लाभांश में उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लाभांश में प्रस्तावित वृद्धि से उन्हें कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
गोदाम से दुकान तक राशन की तौल व्यवस्था पर सवाल
कोटेदारों ने खाद्यान्न की तौल व्यवस्था को लेकर भी गंभीर समस्या पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के सामने रखी। उनका कहना था कि सरकारी राशन की दुकानों पर उपभोक्ताओं को मशीन से तौलकर निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन गोदाम से दुकानों तक भेजे जाने वाले खाद्यान्न की मशीन से तौल नहीं की जाती।
कोटेदारों ने मांग की कि जिस प्रकार उपभोक्ताओं को राशन देते समय इलेक्ट्रॉनिक मशीन से तौल की व्यवस्था है, उसी प्रकार गोदाम से दुकान तक खाद्यान्न भेजते समय भी नियमानुसार मशीन से तौल सुनिश्चित की जाए। उनका कहना था कि इससे खाद्यान्न की मात्रा को लेकर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या विवाद की स्थिति समाप्त हो सकेगी और पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।
दुकान से दूर राशन उतारने का भी आरोप
प्रतिनिधिमंडल ने खाद्यान्न की डिलीवरी व्यवस्था से जुड़ी एक अन्य समस्या भी उठाई। कोटेदारों का आरोप है कि शासनादेश के अनुसार राशन संबंधित सरकारी गल्ले की दुकान तक पहुंचाया जाना चाहिए, लेकिन कई बार परिवहन ठेकेदार राशन को दुकान तक पहुंचाने के बजाय दो से तीन किलोमीटर दूर ही उतार देते हैं।
कोटेदारों के मुताबिक इसके बाद उन्हें स्वयं वाहन, मजदूर अथवा अन्य साधनों की व्यवस्था कर खाद्यान्न को दुकान तक पहुंचाना पड़ता है। इससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक भार उठाना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि राशन की डोर-स्टेप डिलीवरी व्यवस्था का कड़ाई से पालन कराया जाए और खाद्यान्न दुकान तक पहुंचने के बाद ही डिलीवरी पूर्ण मानी जाए।
बोरी और बारदाना का वजन काटकर शुद्ध खाद्यान्न देने की मांग
कोटेदारों ने खाद्यान्न की बोरियों एवं बारदाने के वजन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मांग की कि राशन की वास्तविक मात्रा निर्धारित करते समय बोरी और बारदाना का वजन काटकर शुद्ध खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए।
कोटेदारों का कहना था कि खाद्यान्न की मात्रा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तौल प्रक्रिया स्पष्ट और नियमानुसार होना आवश्यक है। इससे कोटेदारों और विभाग के बीच होने वाले विवादों में भी कमी आएगी तथा उपभोक्ताओं तक निर्धारित मात्रा में राशन पहुंचाना आसान होगा।
विभागीय उत्पीड़न और दबाव की शिकायत
प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय स्तर पर कथित मानसिक एवं आर्थिक उत्पीड़न की शिकायत भी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष से की। कोटेदारों ने आरोप लगाया कि कई बार उन्हें विभागीय अधिकारियों की ओर से अनावश्यक दबाव का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही कुछ अराजक तत्वों द्वारा भी दबाव बनाए जाने की बात कही गई।
कोटेदारों का कहना था कि सरकार ने उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से सरकारी राशन की दुकानों पर खुले बाजार में बिकने वाले अन्य किराना सामान की बिक्री की अनुमति दी है। लेकिन आरोप है कि कुछ लोग दुकानदारों पर निर्धारित अथवा उचित मूल्य से अधिक कीमत पर सामान बेचने का दबाव बनाते हैं। उनकी बात नहीं मानने पर दुर्भावनापूर्ण तरीके से विभागीय कार्रवाई कराने का प्रयास किए जाने का भी आरोप प्रतिनिधिमंडल ने लगाया।
कोटेदारों ने मांग की कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कोई व्यक्ति अनावश्यक दबाव बनाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि कोटेदार बिना भय और दबाव के अपनी दुकान का संचालन कर सकें।
समस्याओं को शासन स्तर पर उठाने का मिला भरोसा
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने प्रतिनिधिमंडल की सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने कोटेदारों को भरोसा दिलाया कि उनकी जायज मांगों और समस्याओं को लेकर शासन स्तर तथा संबंधित उच्चाधिकारियों से वार्ता की जाएगी। उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान और अनावश्यक उत्पीड़न को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप से कोटेदारों की लंबित समस्याओं का समाधान कराने की दिशा में सकारात्मक पहल होगी। कोटेदारों ने लाभांश, खाद्यान्न की तौल, डोर-स्टेप डिलीवरी और विभागीय स्तर पर पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर शीघ्र निर्णय की अपेक्षा जताई।
ये कोटेदार रहे मौजूद
प्रतिनिधिमंडल में रविकांत सिंह, राजेश कुमार त्रिवेदी, चुन्नीलाल, राकेश कुमार, सुरेश कुमार द्विवेदी, अवधेश सिंह, देशराज सिंह, धर्मेंद्र, सत्यम, मोहित सिंह, बृजेश सिंह, गोविंद शुक्ला, राकेश सिंह, उमेश चंद्र, लालू बाजपेई, राम शंकर, पप्पू यादव, नितेश शर्मा, सोनू सिंह चौहान, पंकज सिंह, सुशील सिंह, मिंटू सिंह, लल्लन सिंह एवं सूर्य प्रकाश बाजपेई समेत बीघापुर तहसील क्षेत्र के तमाम कोटेदार मौजूद रहे।
