उन्नाव (उत्तर प्रदेश)। राजनीति और समाज सेवा के क्षेत्र में कई चेहरे आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे व्यक्तित्व होते हैं जो अपने कार्यों से जनता के दिलों में अपनी जगह पक्की कर लेते हैं। भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में ‘गरीबों के मसीहा’ और ‘पीड़ितों के मददगार’ के रूप में पहचाने जाने वाले अंकित सिंह परिहार एक बार फिर अपनी संवेदनशीलता और सेवा भाव के कारण चर्चा में हैं।
संकट की घड़ी में बने सहारा
ताजा मामला भगवंतनगर विधानसभा के ब्लॉक बीघापुर अंतर्गत ग्राम करमी का है। यहाँ के निवासी सूर्यपाल कुशवाहा पिछले कई दिनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बीमारी ने न केवल उनके शरीर को तोड़ दिया था, बल्कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को भी पूरी तरह झकझोर दिया था। बेहद कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि होने के कारण सूर्यपाल जी अपना समुचित इलाज कराने में पूरी तरह असमर्थ थे। घर की जमा-पूंजी खत्म हो चुकी थी और इलाज के भारी-भरकम खर्च के कारण परिवार गहरे मानसिक तनाव में था।
जानकारी मिलते ही सक्रिय हुए अंकित सिंह
जैसे ही इस बात की सूचना समाजसेवक अंकित सिंह परिहार को मिली, उन्होंने बिना एक पल की देरी किए एक जिम्मेदार पारिवारिक सदस्य की तरह इस संकट को अपना माना। अंकित सिंह का हमेशा से एक ही संकल्प रहा है— “भगवंतनगर मेरा परिवार है और इसकी जिम्मेदारी मेरी है।” इसी सिद्धांत पर चलते हुए उन्होंने तत्काल अपने स्तर से आर्थिक प्रबंध किए।
उन्होंने न केवल मरीज का हाल-चाल जाना, बल्कि अस्पताल में उनके इलाज के लिए आवश्यक धनराशि जमा करवा दी। इलाज के लिए जमा की गई राशि की रसीदें उन्होंने स्वयं सूर्यपाल कुशवाहा और उनके परिजनों को सौंपी। इस दौरान उन्होंने उन्हें ढांढस बंधाया और ईश्वर से उनके शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की मंगलकामना की।
बीते 20 वर्षों का अटूट समर्पण
अंकित सिंह परिहार की यह सेवा भावना कोई नई बात नहीं है। पिछले 20 वर्षों से वे प्रतिदिन और प्रतिपल क्षेत्र की जनता की सेवा में समर्पित हैं। उनके लिए राजनीति कोई पद पाने का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों के आंसू पोंछने का जरिया है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जब भी किसी गरीब की बेटी की शादी हो, किसी का इलाज हो या कोई अन्य सामाजिक आपदा, अंकित सिंह हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े नजर आते हैं।
क्षेत्र में ‘मसीहा’ की छवि
बीघापुर और भगवंतनगर के स्थानीय निवासियों में अंकित सिंह परिहार के प्रति अटूट विश्वास है। सूर्यपाल कुशवाहा के परिजनों ने भावुक होते हुए कहा:
”अगर आज अंकित भैया आगे न आते, तो हमारे लिए इलाज कराना नामुमकिन था। उन्होंने सिर्फ पैसे नहीं दिए, बल्कि हमारे पूरे परिवार को एक नया जीवन और उम्मीद दी है।”
सेवा ही परम धर्म
आज के दौर में जहाँ समाज सेवा अक्सर फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गई है, वहाँ अंकित सिंह परिहार जैसे लोग यह साबित करते हैं कि यदि सेवा की भावना सच्ची हो, तो कोई भी व्यक्ति अकेला नहीं पड़ता। बीघापुर के ग्राम करमी में हुआ यह कार्य उनके “सेवा परमो धर्म:” के संकल्प की एक और महत्वपूर्ण कड़ी है।
भगवंतनगर की जनता आज अंकित सिंह परिहार को न केवल एक नेता, बल्कि अपने परिवार के एक रक्षक के रूप में देखती है, जो हर सुख-दुख में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं।
