फसल अवशेष के बेहतर प्रबंधन से किसानों को मिलेगा लाभ
उन्नाव। फसल अवशेष के वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले में 32 लाख रुपये के अनुदान से एक एग्रीगेटर की स्थापना की जाएगी। यह पहल प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिड्यू (सी.आर.एम.) योजना एवं सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन के अंतर्गत की जा रही है।
कृषि निदेशालय उत्तर प्रदेश (अभियंत्रण) अनुभाग, कृषि भवन लखनऊ द्वारा जारी पत्र संख्या 954/एग्रीगेटर दिनांक 31 जुलाई 2025 के अनुसार, जिले में एफपीओ (कृषक उत्पादक संगठन) एवं उनके सदस्य कृषकों को एग्रीगेटर के रूप में चयनित किया जाएगा। इसके लिए कृषि यंत्रों के वितरण और चयन प्रक्रिया की रूपरेखा निर्धारित की गई है।
इस योजना के तहत एफपीओ का चयन निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाएगा। चयन के लिए एफपीओ का वार्षिक टर्नओवर कम से कम 10 लाख रुपये होना आवश्यक है, जबकि अधिक टर्नओवर वाले संगठनों को प्राथमिकता दी जाएगी। एफपीओ में कम से कम 100 शेयरधारक होना अनिवार्य है और उसका वार्षिक रिटर्न नियमित रूप से दाखिल होना चाहिए। साथ ही संगठन भारत सरकार या कंपनी रजिस्ट्रार द्वारा प्रतिबंधित न हो तथा उसके विरुद्ध कोई न्यायालयीन वाद लंबित न हो।
कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के लिए एफपीओ का पंजीकरण निर्धारित पोर्टल पर सक्रिय होना चाहिए। अनुसूचित जाति श्रेणी में चयनित एफपीओ में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य अनुसूचित जाति वर्ग से होने चाहिए। एफपीओ का पंजीकरण सोसाइटी एक्ट या कंपनी एक्ट में कम से कम एक वर्ष पूर्व का होना चाहिए। जो संगठन पूर्व में कृषि विभाग की अन्य योजनाओं में अनुदान प्राप्त कर चुके हैं, वे इस योजना का लाभ नहीं उठा सकेंगे। कृषि यंत्रों की खरीद के लिए एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के माध्यम से ऋण लेना अनिवार्य किया गया है।
जनपद के सभी एफपीओ को निर्देशित किया गया है कि वे अपने आवेदन 10 नवम्बर 2025 तक कार्यालय उप कृषि निदेशक, उन्नाव में प्रस्तुत करें।
यह योजना किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों तक पहुंच प्रदान करेगी, जिससे फसल अवशेष जलाने की समस्या में कमी आएगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और उत्पादन क्षमता में भी सुधार होगा, जिससे जिले के कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।
