सूर्यपाल (प्रोटेक) संपादकीय सलाहकार
पाटन (उन्नाव)। सुमेरपुर छांछीराईखेड़ा स्थित लोटस कान्वेंट स्कूल में बैसवाड़ा ब्राह्मण उत्थान समिति के तत्वावधान में देवोत्थानी एकादशी के अवसर पर चतुर्दश विश्व वैदिक सम्मेलन एवं सामूहिक उपनयन संस्कार का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शास्त्रोक्त विधि से कुल 104 बटुकों का उपनयन संस्कार संपन्न कराया गया, जिन्हें गायत्री मंत्र की दीक्षा दी गई।
कार्यक्रम में नागपुर से पधारे स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती ने कहा कि “भारत भगवान का हृदय और धर्म की भूमि है।” उन्होंने कहा कि उपनयन संस्कार ब्राह्मण को ब्राह्मण बनाने की प्रक्रिया है। ब्राह्मण का दायित्व विश्व कल्याण करना है, इसलिए धर्म कार्य में शिथिलता नहीं बरतनी चाहिए और ब्रह्मतेज प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
वरिष्ठ भाजपा नेता संजय विनायक जोशी ने कहा कि नेता समाज की भौतिक समस्याओं का समाधान करता है, जबकि संत समाज के मन को बदलने का कार्य करते हैं। गायत्री साधना से हम सूर्य से ऊर्जा प्राप्त कर समाज के उत्थान में योगदान देते हैं।
स्वामी सिद्धेश्वर आनंद गिरी ने कहा कि आज जनेऊ केवल धागा बनकर रह गया है, जबकि यह कर्तव्य और आचरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “ब्राह्मण या हिंदू नहीं, बल्कि वही खतरे में है जिसे अपने कर्तव्य का बोध नहीं है।” उन्होंने अगले वर्ष क्षत्रिय और वैश्य समाज के उपनयन संस्कार कराने का सुझाव भी दिया।
इस अवसर पर बैसवाड़ा ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पांडेय ने कहा कि बटुक भारतीय संस्कारों के प्रतीक हैं और उपनयन संस्कार समाज की संस्कृति का आधार है।
कार्यक्रम में बालगोविंद द्विवेदी, डॉ. प्रेमशंकर मिश्र, कमलाकांत त्रिवेदी को शिक्षारत्न सम्मान तथा संजय विनायक जोशी, के.के. शुक्ला, अंबिका शुक्ला को ब्राह्मण गौरव सम्मान से अलंकृत किया गया।
इस अवसर पर एमएलसी राज बहादुर सिंह चंदेल, पुष्पेंद्र प्रताप सिंह, अंकित परिहार, विकास मिश्र, सियाराम पांडेय शांत, अशोक मिश्र, शानू अवस्थी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
