उन्नाव। ज़िले में बिजली विभाग की लापरवाही एक बार फिर मौत का सबब बन गई। सोहरामऊ थाना क्षेत्र के बौरीखेड़ा गांव में रविवार रात हाईटेंशन लाइन के झूलते तारों ने 22 वर्षीय गोविंद यादव की जिंदगी छीन ली। युवक खेत की ओर जा रहा था, तभी नीचे लटक रहे तारों में करंट की चपेट में आकर उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
रविवार रात आठ बजे हुआ हादसा
गोविंद यादव अपने दो भाइयों में सबसे छोटा था और रात करीब आठ बजे धान पिटवाने के लिए खेत जा रहा था। रास्ते में गांव के बाहर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन के पुराने तार काफी नीचे लटक आए थे। अंधेरा होने की वजह से गोविंद उन्हें देख नहीं पाया और करंट की चपेट में आ गया। परिजनों ने जब उसे खेत के पास गिरा हुआ देखा तो वह दम तोड़ चुका था।
गांव में मातम, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
अचानक हुई इस दुर्घटना ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है। गोविंद की मां गुड्डी देवी और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार बिजली विभाग को झूलती लाइन के बारे में शिकायत कर चुके थे, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का आरोप: समय पर मरम्मत होती तो बच जाती जान
गांव वालों के मुताबिक हाईटेंशन लाइन लंबे समय से खराब थी। यदि विभाग समय रहते इसकी मरम्मत कर देता तो यह जानलेवा हादसा टल सकता था। लोगों का कहना है कि विभाग अक्सर सिर्फ कागज़ी काम दिखाने और आधा-अधूरा काम करने में जुटा रहता है।
विभाग का दावा: 80% मरम्मत पूरी थी
पाठकपुर पावर हाउस के जेई संतोष कुमार का कहना है कि लाइन पुरानी थी और मरम्मत का काम चल रहा था। उनके अनुसार 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि—
क्या बाकी 20% काम ही सबसे जरूरी और जान बचाने वाला नहीं था?
अगर काम चल रहा था, तो फिर यह हादसा कैसे हो गया?
विभाग की सफाई ने ग्रामीणों के गुस्से को शांत नहीं किया है। लोग सिस्टम की नाकामी और लापरवाही को सीधी जिम्मेदार मान रहे हैं।
पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव
सोहरामऊ थाना प्रभारी संदीप शुक्ला ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। वहीं गांव के लोग मांग कर रहे हैं कि बिजली विभाग पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
समाज के लिए चेतावनी
यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए गंभीर सवाल खड़ा करता है। कब तक लापरवाही की मौतें होती रहेंगी? क्या अब भी कोई कार्रवाई से बच पाएगा, या जिम्मेदार विभाग सच में जागेगा?
