पाटन (उन्नाव)। तहसील बीघापुर अन्तर्गत तकिया मेले में लगने वाले मौत का कुआँ को लेकर न्यू उन्नाव पब्लिक इंटर कॉलेज के प्रबंधक ने गम्भीर आपत्ति जताई है। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि मेले के दौरान मौत के कुएँ से उत्पन्न होने वाला शोर-शराबा, तेज मोटर वाहनों की आवाजें, माइकिंग और भारी भीड़ न केवल शिक्षण कार्य में बाधा डालती हैं, बल्कि बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अत्यधिक अवांछित वातावरण भी पैदा करती हैं।
प्रबंधक अरविंद पटेल ने उपजिलाधिकारी बीघापुर रणवीर सिंह को सौंपे प्रार्थना-पत्र में उल्लेख किया कि गत वर्ष मेले में मौत का कुआँ विद्यालय से लगभग 60 मीटर की दूरी पर स्थापित किया गया था। इस कारण कई दिनों तक स्कूल परिसर में पढ़ाई बाधित रही। कई कक्षाओं में अध्यापकों को पढ़ाने में दिक्कत आई, और छात्र निरंतर शोर से परेशान होकर पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाए।
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इंटरमीडिएट सहित विभिन्न कक्षाओं की परीक्षाएँ निकट हैं, और ऐसे समय में शांत एवं अनुशासित वातावरण की अत्यंत आवश्यकता है। शोर प्रदूषण का स्तर बढ़ने से न केवल छात्रों की मानसिक एकाग्रता प्रभावित होती है, बल्कि आसपास के शैक्षणिक माहौल पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है।
प्रबंधक पटेल ने मांग की है कि इस वर्ष मौत का कुआँ विद्यालय से कम से कम 200 मीटर या उससे अधिक दूरी पर लगाया जाए, ताकि विद्यालय परिसर में शांति बनी रहे और छात्रों की पढ़ाई पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा की है कि छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए उचित दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।
विद्यालय प्रबंधन द्वारा दिए गए शिकायती पत्र पर एसडीएम बीघापुर ने मामले की जाँच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित किए जाने का आश्वासन दिया है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि छात्रों की सुविधा और शैक्षणिक वातावरण के मद्देनज़र प्रशासन को इस मुद्दे पर संवेदनशीलता से निर्णय लेना चाहिए।
