लखनऊ। उत्तर प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक फेरबदल की हलचल तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी नेतृत्व नए चेहरे की तलाश में जुट गया है। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष की दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से हुई बैठक को इसी प्रक्रिया का अंतिम दौर माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर सहमति बन चुकी है और जल्द ही ऐलान हो सकता है।
ओबीसी समीकरण पर भाजपा की नजर
पिछले एक दशक से यूपी भाजपा का नेतृत्व लगातार ओबीसी समुदाय से आता रहा है। पार्टी ने जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए क्रमशः तीन बड़े ओबीसी समुदायों को कमान सौंपी—
- मौर्य समाज से केशव प्रसाद मौर्य,
- कुर्मी समुदाय से स्वतंत्र देव सिंह,
- और जाट समाज से भूपेंद्र चौधरी।
इस सिलसिले को देखते हुए माना जा रहा है कि नया प्रदेश अध्यक्ष भी ओबीसी समुदाय से ही चुना जाएगा। अब पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगला दांव किस जातीय समूह पर लगाया जाए।
गैर-यादव ओबीसी पर फोकस
भाजपा का मुख्य लक्ष्य गैर-यादव ओबीसी वोटबैंक को और मजबूत करना है। मौर्य, कुर्मी और जाट नेताओं को अध्यक्ष बनाकर पार्टी इन जातियों को साध चुकी है। अब संभावनाओं का दायरा लोधी, निषाद और पाल समुदायों की ओर बढ़ रहा है—जो कई क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
लोधी, निषाद और पाल: सबसे आगे कौन?
1. लोधी समुदाय – मजबूत परंपरागत आधार
लोधी जाति भाजपा का पुराना और भरोसेमंद वोटबैंक रही है। इस वर्ग से जुड़े प्रमुख नाम—
- धर्मपाल सिंह (कैबिनेट मंत्री)
- संदीप सिंह (स्व. कल्याण सिंह के पोते व मंत्री)
- बीएल वर्मा (केंद्रीय राज्य मंत्री), जिन्हें शीर्ष नेतृत्व का करीबी माना जाता है।
2. निषाद समुदाय – पूर्वांचल से लेकर पश्चिम तक प्रभाव
करीब 6% आबादी वाला निषाद समाज भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक आधार बन सकता है। चर्चित नाम—
- साध्वी निरंजन ज्योति (पूर्व केंद्रीय मंत्री)
- बाबूराम निषाद (संगठन का भरोसेमंद चेहरा)
निषाद वोटबैंक साधने के साथ हिंदुत्व की धुरी को भी मजबूती मिल सकती है।
3. पाल समुदाय – अतिपिछड़ों को साधने की रणनीति
करीब 3% वोट वाला पाल समुदाय कई सीटों पर असर रखता है। इस समुदाय से—
- एसपी बघेल (केंद्रीय मंत्री)
सबसे प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। पाल वोटबैंक जोड़कर भाजपा अतिपिछड़ों में गहरी पैठ बना सकती है।
अन्य नाम भी चर्चा में
इसके अलावा इन नेताओं का नाम भी संभावित सूची में बताया जा रहा है—
- अमरपाल मौर्य (पूर्व सांसद)
- अशोक कटारिया
- विद्यासागर सोनकर
- स्वतंत्र देव सिंह (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष)
- दिनेश शर्मा (राज्यसभा सांसद)
2027 की तैयारी की पहली कड़ी
नए प्रदेश अध्यक्ष का चयन भाजपा की 2027 विधानसभा चुनाव रणनीति का शुरुआती और सबसे अहम कदम माना जा रहा है। पार्टी ऐसा चेहरा चुनना चाहती है जो न केवल संगठन को सशक्त करे, बल्कि जातीय समीकरणों को भी संतुलित करते हुए यूपी में सत्ता की राह दोबारा आसान बना सके।
