रास्ता ही नहीं तो उपमंडी क्यों बनाई? किसानों का प्रशासन से सवाल
उन्नाव । तहसील बीघापुर मुख्यालय पाटन क्षेत्र में वर्ष 2019 में धूमधाम से उद्घाटन की गई उपमंडी आज पाँच वर्ष बीत जाने के बाद भी किसानों के किसी काम नहीं आ रही। लाखों रुपये खर्च कर तैयार किए गए इस उपमंडी भवन का संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है। किसान आज भी उसी प्रश्न से जूझ रहे हैं—“जब उपमंडी तक पहुँचने का रास्ता ही नहीं था, तो इसे बनाया क्यों गया?”
सड़क न बनने से उपमंडी ‘उपयोगहीन’
स्थानीय लोगों ने बताया कि उपमंडी तो बन गई, लेकिन वहाँ तक जाने वाली सड़क संकरी और बेहद खराब है। भारी वाहनों का पहुँचना लगभग असंभव है। ट्रक नहीं पहुँच पाने की वजह से न तो तौल संचालन हो सकता है और न ही खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया शुरू हो पा रही है। यही कारण है कि उद्घाटन के पाँच साल बाद भी उपमंडी का ताला नहीं खुला है।
किसानों का कहना है कि उपमंडी बनने से उन्हें उम्मीद जगी थी कि अब फसल बेचने में आसानी होगी, लेकिन सुविधा के अभाव में यह सपना अधूरा रह गया।
एक किसान ने कहा—“सरकार ने भवन तो बना दिया, लेकिन रास्ता नहीं बनाया। यह कैसी योजना है?”
किसानों की मांग—रास्ता सुधरे, उपमंडी शुरू हो
किसानों ने शासन-प्रशासन से उपमंडी तक जाने वाली सड़क का चौड़ीकरण, मरम्मत, और भारी वाहनों के अनुकूल पक्का मार्ग बनवाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि जब तक सड़क ठीक नहीं होगी, तब तक लाखों की लागत से बनी उपमंडी बेकार पड़ी रहेगी।
सवालों के घेरे में योजना
स्थानीय लोग प्रशासन से यह भी पूछ रहे हैं कि—
“अगर उपमंडी तक पहुँचने का उपयुक्त मार्ग ही नहीं था, तो निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई?”
“क्या जनता के पैसे से बनी यह उपमंडी सिर्फ कागज़ी उपलब्धि थी?”
बीघापुर मंडी समिति (पुरवा) के अंतर्गत बनी यह उपमंडी आज सरकारी योजनाओं की कुव्यवस्था और लापरवाही की स्पष्ट तस्वीर पेश कर रही है।
अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई की मांग
किसानों ने अधिकारियों से जल्द निर्णय लेकर सड़क निर्माण कार्य शुरू करने और उपमंडी को चालू कराने की दिशा में ठोस प्रयास करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उपमंडी चालू होने से पूरे क्षेत्र के किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा और उनकी उपज बेहतर दाम पर समय से बिक सकेगी।
