नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए संबोधन को लेकर विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का एक वीडियो अंश सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए उनकी कार्यशैली और आत्मविश्वास पर सवाल उठाए।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान उनका व्यवहार एक ऐसे नेता का नजर आया जो दबाव में है और आत्मविश्वास की कमी महसूस कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री को लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि उनका अंदाज “कम आत्मविश्वास वाला, घबराया हुआ और डगमगाता हुआ” दिखाई दिया।
केजरीवाल ने जिस वीडियो अंश को साझा किया, उसमें प्रधानमंत्री मोदी भारत के बायो-इकोनॉमी सेक्टर में 2014 के बाद हुई प्रगति का उल्लेख करते दिखाई दे रहे हैं। इसी संदर्भ में केजरीवाल ने प्रधानमंत्री के भाषण की शैली और प्रस्तुति को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी विपक्ष का हमला
स्वतंत्रता दिवस के भाषण में महिला आरक्षण के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणियों को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि महिला आरक्षण से जुड़ा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ सितंबर 2023 में संसद से पारित हो चुका था।
रमेश का आरोप है कि सरकार ने इस कानून के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक रूप से भ्रम की स्थिति पैदा की। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू नहीं हो सका और बाद में अप्रैल 2026 में इसे प्रभावी बनाया गया।
हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, संसद ने सितंबर 2023 में संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से जाना गया, पारित किया था। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया। यह कानून 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुआ।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से लागू करने की दिशा में 2026 में आगे की प्रक्रिया शुरू की गई।
1993 के संवैधानिक संशोधनों का भी हवाला
जयराम रमेश ने महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के जरिए 1993 में मजबूत हुई थी।
वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले भी महिला आरक्षण के मुद्दे पर पहले से संसद में अपनी स्थिति स्पष्ट करती रही हैं। सितंबर 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान उन्होंने कानून का समर्थन किया था, हालांकि उसके क्रियान्वयन की समयसीमा को लेकर सवाल उठाए थे।
अप्रैल 2026 में भी विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण के समर्थन की बात कही थी, लेकिन इसके क्रियान्वयन के तरीके और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर केंद्र सरकार से अलग राय जताई थी।
स्वतंत्रता दिवस पर तेज हुई सियासी बहस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद महिला आरक्षण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सरकार की नीतियों को लेकर विपक्ष के हमले ने सियासी बहस को तेज कर दिया है। एक ओर केंद्र सरकार महिला भागीदारी को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष कानून के क्रियान्वयन और सरकार की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठा रहा है।
महिला आरक्षण अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। सरकार इसे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया और समयसीमा पर लगातार सवाल उठाता रहा है।
(नोट: इस खबर में नेताओं द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोपों को उनके बयानों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।)
