नई दिल्ली। संसद परिसर में राम मंदिर के नाम पर कथित धन की हेराफेरी के विरोध में हुए प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। प्रदर्शन के दौरान निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भगवा वस्त्र पहनकर प्रतीकात्मक रूप से एक पुजारी की भूमिका निभाई और दानपात्र से पैसे जेब में रखने का अभिनय किया। उनका कहना था कि यह प्रदर्शन मंदिरों में मिलने वाले दान के कथित दुरुपयोग की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए किया गया था।
इस प्रदर्शन के बाद मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गरमा गया है। भाजपा नेताओं की शिकायत पर वाराणसी, दिल्ली और जहांगीरपुरी में राहुल गांधी, अवधेश प्रसाद और पप्पू यादव के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने सहित विभिन्न आरोपों में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। संबंधित मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
पप्पू यादव का पक्ष
विवाद के बीच पप्पू यादव ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी धर्म या आस्था का अपमान करना नहीं था। उन्होंने कहा कि उनका विरोध उन लोगों के खिलाफ है जो धर्म और श्रद्धालुओं के दान का कथित रूप से दुरुपयोग करते हैं।
उन्होंने कहा, “क्या मंदिर का पैसा लूटने वालों की पोल खोलना गलत है? क्या करोड़ों लोगों की आस्था और चढ़ावे की सुरक्षा की बात करना कोई गुनाह है?”
“विरोध से नहीं डरूंगा”
पप्पू यादव ने अपने बयान में कहा कि वे किसी भी दबाव या विरोध से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि धर्म के नाम पर भ्रष्टाचार और कथित लूट के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत चुकानी पड़े, तो भी वे अपनी बात कहते रहेंगे।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि दर्ज शिकायतों पर संबंधित एजेंसियां कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर रही हैं।
