विश्व पर्यावरण दिवस पर लगाए जाने के लिए आए पौधे महीनों तक पड़े रहे, जिम्मेदार विभागों की अनदेखी से अभियान पर उठे सवाल
बिछिया (उन्नाव)। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को बिछिया विकासखंड में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही ने झटका दिया है। विकासखंड के कोरारी कला गांव स्थित आरआरसी (रिसोर्स रिकवरी सेंटर) तथा ओरहर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में पौधरोपण के लिए वन विभाग से पहुंचे सैकड़ों पौधे समय पर नहीं लगाए गए। परिणामस्वरूप अधिकांश पौधे वहीं पड़े-पड़े सूख गए।
सरकार की ओर से विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया गया था। इस अभियान के तहत लाखों पौधे विभिन्न विभागों और ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराए गए थे ताकि समय रहते उनका रोपण कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सके। लेकिन बिछिया ब्लॉक के इन दो स्थानों पर सरकारी मंशा पर अधिकारियों की लापरवाही भारी पड़ती दिखाई दे रही है।
आरआरसी सेंटर में सूख गए पौधे
कोरारी कला ग्राम पंचायत का चार्ज एडीओ पंचायत संदीप मिश्रा के पास है। यहां स्थित आरआरसी सेंटर में वन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए पौधों को लगाने के बजाय लंबे समय तक खुले में छोड़ दिया गया। उचित देखभाल और सिंचाई के अभाव में अधिकांश पौधे सूख गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर पौधरोपण कर दिया जाता तो ये पौधे पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते थे।
ग्रामीणों का आरोप है कि शासन द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार कर्मचारियों की उदासीनता के कारण यह अभियान केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाता है।
ओरहर पीएचसी में भी नहीं लगाए गए पौधे
ऐसा ही मामला विकासखंड के ओरहर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भी सामने आया है। यहां भी पौधरोपण के लिए वन विभाग से पौधे भेजे गए थे, लेकिन उन्हें जमीन में लगाने के बजाय परिसर में ही छोड़ दिया गया। देखभाल के अभाव में अधिकांश पौधे सूख गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य केंद्र परिसर में इन पौधों का रोपण किया जाता तो मरीजों और तीमारदारों को भविष्य में छायादार एवं स्वच्छ वातावरण मिल सकता था।
अधिकारियों ने कही जांच की बात
इस मामले में ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) फहद खान ने कहा कि उन्हें पौधों के सूखने की जानकारी नहीं थी। मामला संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं सीएचसी प्रभारी डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि जब वह मौके पर गए थे तब परिसर में पानी भरा हुआ था, जिसके कारण पौधरोपण नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि वह स्वयं स्थल का निरीक्षण करेंगे और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी अभियान पर उठ रहे सवाल
सरकार हर वर्ष करोड़ों पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित करती है और पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार अभियान चलाए जाते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर यदि पौधे लगाने से पहले ही सूख जाएं तो यह न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी कमजोर करता है। ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने भविष्य में पौधरोपण अभियान की नियमित निगरानी और समय पर पौधों के रोपण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की है।
