उन्नाव। उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए उन्नाव जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी (डीएम) घनश्याम मीणा ने बीघापुर तहसील के सुमेरपुर विकास खंड अंतर्गत ग्राम सभा कुतुबपुर की उचित दर दुकान (राशन कोटे) का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई राशन वितरण में गंभीर गड़बड़ी और सरकारी नियमों के खुले उल्लंघन की पुष्टि के बाद की गई है।
पात्रों के हक पर डाका डालने की मिली थी शिकायतें
जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम सभा कुतुबपुर के उचित दर विक्रेता रामशंकर के खिलाफ कार्डधारकों को राशन न देने और वितरण में धांधली करने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) बीघापुर और जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) को संयुक्त रूप से जांच के निर्देश दिए थे।
जांच में नहीं दिखा सका अभिलेख, खुली पोल
जांच अधिकारी जब मौके पर पहुंचे, तो उचित दर विक्रेता रामशंकर से वितरण से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे गए। इनमें वितरण रजिस्टर, प्रारूप ‘क’ और ‘ख’, वितरण प्रमाण पत्र तथा स्टॉक रजिस्टर शामिल थे। लेकिन विक्रेता अधिकारियों के सामने कोई भी आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके अलावा, जांच रिपोर्ट में यह भी साफ हुआ कि पात्र लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न नहीं दिया जा रहा था और बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती जा रही थी।
डीएम घनश्याम मीणा की कोटेदारों को दो टूक चेतावनी
जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने पर जिलाधिकारी घनश्याम मीणा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कोटेदार का लाइसेंस निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया। जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में कहा:
”गरीबों के हक पर डाका डालने वाले और राशन की कालाबाजारी करने वाले किसी भी सूरत में बख्शे नहीं जाएंगे। पात्र कार्डधारकों को निर्धारित मात्रा में और पूरी पारदर्शिता के साथ खाद्यान्न उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
अधिकारियों को त्वरित निस्तारण के निर्देश
डीएम ने जनपद के सभी उचित दर विक्रेताओं (कोटेदारों) को कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि कहीं भी खाद्यान्न वितरण में घटतौली या किसी अन्य प्रकार की गड़बड़ी पाई गई, तो सीधे एफआईआर (FIR) और निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को भी निर्देशित किया है कि वे सार्वजनिक वितरण प्रणाली की नियमित निगरानी करें और जनता से मिलने वाली शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें।
