दोहा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि ग़ाज़ा पट्टी में हालात में किसी भी बदलाव के दौरान उसकी पश्चिमी तट के साथ एकता और इसराइल-फ़लस्तीन के दो-राष्ट्र समाधान की प्रक्रिया को बनाए रखना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग़ाज़ा में किसी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा या स्थिरीकरण बल की तैनाती केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति से ही की जा सकती है।
क़तर की राजधानी दोहा में आयोजित विश्व सामाजिक विकास सम्मेलन के दौरान मीडिया से बातचीत में महासचिव ने यह बात कही। उनसे अमेरिकी राष्ट्रपति की उस योजना पर सवाल किया गया था जिसमें ग़ाज़ा में एक अस्थायी अंतरराष्ट्रीय बल भेजने का प्रस्ताव रखा गया है।
गुटेरेश ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ग़ाज़ा में ज़रूरतमंद लोगों तक मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की मदद से इसराइल ने कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है, जिससे राहत कार्यों में आंशिक सुधार हुआ है।
“संघर्षविराम को बनाए रखना और ग़ाज़ा व पश्चिमी तट के संबंधों को एकजुट रखना बेहद आवश्यक है,” — एंतोनियो गुटेरेश, संयुक्त राष्ट्र महासचिव
महासचिव के अनुसार, आने वाले समय में ऐसा प्रशासनिक ढांचा बनना चाहिए जिसमें फ़लस्तीनी प्राधिकरण अपने अधिकारों का स्वतंत्र रूप से प्रयोग कर सके।
🤝 मानवीय सहायता और चुनौतियाँ
ग़ाज़ा में भोजन और ज़रूरी वस्तुओं की आपूर्ति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, अब तक लगभग 10 लाख लोगों तक भोजन पैकेट पहुँचाए गए हैं, जबकि लक्ष्य 16 लाख का था। सीमित आपूर्ति के कारण हर परिवार को केवल 10 दिनों का राशन दिया जा रहा है।
राहत एजेंसियों ने बताया कि केवल दो सीमा चौकियाँ — किस्सुफ़िम और केरेम शलोम — खुली हैं, जिससे राहत सामग्री लाने-ले जाने में दिक्कतें आ रही हैं।
कई परिवार अब भी अस्थाई टैंटों में रह रहे हैं और उनके पास पर्याप्त भोजन या स्वास्थ्य सुविधाएँ नहीं हैं।
💬 “मिल रही मदद ही उम्मीद है”
WFP अधिकारी नूर हम्माद के अनुसार, ग़ाज़ा में हालात बेहद कठिन हैं, लेकिन लोग युद्धविराम से कुछ राहत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा —
“कई महीनों की भूख और संघर्ष के बाद अब जो थोड़ी सहायता मिल रही है, वही उनके लिए उम्मीद की किरण है।”
उन्होंने बताया कि स्थानीय बाज़ारों में सामान आने लगा है, लेकिन कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि आम परिवारों के लिए चीज़ें खरीदना मुश्किल हो गया है।
एक सेब की कीमत अब उतनी है जितनी दो साल पहले एक किलो सेब की थी।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दोहराया कि ग़ाज़ा की स्थिरता और शांति केवल तभी सम्भव है जब दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएँ और फ़लस्तीनी प्राधिकरण को अपने क्षेत्र पर पूरा अधिकार मिले।
Source – un
