वॉशिंगटन/ब्रसेल्स: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र के भविष्य को लेकर एक बड़े कूटनीतिक बदलाव का संकेत दिया है। नेटो (NATO) प्रमुख के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद, ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका अब ग्रीनलैंड को लेकर एक संभावित समझौते के ‘फ्रेमवर्क’ पर काम कर रहा है। इसके साथ ही, उन्होंने ग्रीनलैंड अधिग्रहण का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर दंडात्मक टैरिफ लगाने की अपनी पूर्व योजना को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
वार्ता का मुख्य बिंदु: आर्कटिक सुरक्षा
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी साझा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने नेटो प्रमुख के साथ हुई मुलाकात को “बेहद सार्थक” बताया। उन्होंने कहा:
”हमने ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र को लेकर एक भविष्य के समझौते का ढांचा (फ्रेमवर्क) तैयार कर लिया है। यदि यह समाधान अंतिम रूप ले लेता है, तो यह अमेरिका और सभी नेटो सहयोगियों के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।”
नेटो ने भी इस चर्चा की पुष्टि करते हुए कहा कि भविष्य की बातचीत मुख्य रूप से आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने पर केंद्रित होगी।
सैन्य बल के इस्तेमाल से इनकार
इससे पहले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में बोलते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण हासिल करने के लिए सैन्य बल का प्रयोग नहीं करेंगे। उन्होंने जोर दिया कि वह केवल कूटनीतिक और व्यापारिक बातचीत के माध्यम से क्षेत्र के स्वामित्व या सुरक्षा स्थिति पर एक सहमति चाहते हैं।
कूटनीतिक प्रगति और प्रमुख नियुक्तियां
इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति ने अपनी कोर टीम को जिम्मेदारी सौंपी है:
- मार्को रुबियो (विदेश मंत्री): बातचीत की बारीकियों पर नजर रखेंगे।
- स्टीव विटकॉफ़ (विशेष दूत): सीधे राष्ट्रपति को रिपोर्ट करेंगे।
डेनमार्क की प्रतिक्रिया
डेनमार्क, जिसके पास ग्रीनलैंड का प्रशासनिक अधिकार है, ने इस ताजा घटनाक्रम पर राहत जताई है। डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमसेन ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा, “दिन की शुरुआत जिस तनाव के साथ हुई थी, उसका अंत उससे कहीं बेहतर मोड़ पर हुआ है।”
भविष्य की राह: हालांकि समझौते के विस्तृत विवरण अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन टैरिफ की धमकी वापस लेने से अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच मंडरा रहे व्यापार युद्ध के बादल फिलहाल छंटते नजर आ रहे हैं। आने वाले हफ्तों में आर्कटिक की सुरक्षा और संसाधनों को लेकर वाशिंगटन और ब्रसेल्स के बीच गहन चर्चा होने की उम्मीद है।
