नई दिल्ली/दावोस। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। 27 जनवरी को दोनों पक्ष आधिकारिक तौर पर मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) की घोषणा करने वाले हैं। इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (सभी समझौतों की जननी) कहा जा रहा है, क्योंकि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने का माद्दा रखता है।
गणतंत्र दिवस पर ईयू को विशेष सम्मान
इस समझौते की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत ने अपने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों को ही मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। इस दौरान दिल्ली के मंच से न केवल सामरिक बल्कि आर्थिक दोस्ती का भी नया शंखनाद होगा।
दावोस से उर्सुला वॉन डेर लेयेन का बड़ा बयान
स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) में यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस डील की पुष्टि की। उन्होंने कहा, “हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बिल्कुल करीब हैं। यह समझौता 2 अरब लोगों के साझा बाज़ार का निर्माण करेगा, जो वैश्विक जीडीपी के लगभग एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।”
उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि इस समझौते से यूरोप को ‘फर्स्ट मूवर एडवांटेज’ मिलेगा, क्योंकि किसी भी अन्य बड़े आर्थिक समूह ने भारत के साथ इस स्तर का व्यापक समझौता अभी तक नहीं किया है।
क्या है एफ़टीए और भारत को क्या होगा फायदा?
मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत और ईयू एक-दूसरे के सामानों के लिए अपने बाज़ार के दरवाजे खोल देंगे।
- कम होगा टैरिफ: भारतीय उत्पादों (जैसे कपड़ा, चमड़ा, और हस्तशिल्प) को यूरोपीय बाज़ार में कम या शून्य टैरिफ पर पहुँच मिलेगी।
- बाज़ार का विस्तार: भारतीय निर्यातकों के लिए 27 यूरोपीय देशों का विशाल बाज़ार खुल जाएगा।
- निवेश में वृद्धि: यूरोपीय तकनीक और निवेश भारत के निर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) को नई गति देंगे।
अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच बड़ी कूटनीतिक जीत
यह समझौता ऐसे समय में हो रहा है जब भारत को अमेरिका के साथ व्यापार में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में भारत अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ का दबाव झेल रहा है और कोई ट्रेड डील फाइनल नहीं हो पाई है। ऐसे में यूरोपीय संघ के साथ यह एफ़टीए भारत के लिए एक बड़े विकल्प के रूप में उभरेगा, जिससे अमेरिकी निर्भरता कम होगी और भारत को होने वाले व्यापारिक नुकसान की भरपाई संभव हो सकेगी।
खबर के मुख्य अंश (Highlights):
- तारीख: 27 जनवरी को होगी आधिकारिक घोषणा।
- बाज़ार का आकार: 2 अरब लोग और वैश्विक जीडीपी का 25% हिस्सा।
- मुख्य अतिथि: गणतंत्र दिवस परेड में ईयू प्रतिनिधि होंगे शामिल।
- रणनीतिक महत्व: अमेरिका के व्यापारिक दबाव के बीच भारत का बड़ा कदम।
