रायबरेली। उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर जन-आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। गाजीपुर में किशोरी निशा विश्वकर्मा की जघन्य हत्या और हरदोई में शिल्पी कुशवाहा के साथ हुई दरिंदगी के विरोध में अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा ने जोरदार प्रदर्शन किया।
मंगलवार को महासभा के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों को फांसी दिए जाने की मांग उठाई।
क्या है पूरा मामला?
मामला गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र के ग्राम कटरिया से जुड़ा है, जहां सियाराम विश्वकर्मा की नाबालिग पुत्री निशा विश्वकर्मा के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म के बाद उसकी निर्मम हत्या कर दी गई और साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को गंगा नदी में फेंक दिया गया।
घटना की गंभीरता तब और बढ़ गई जब इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे पूर्व मंत्री रामआसरे विश्वकर्मा के काफिले पर गांव में ही पथराव कर दिया गया। इस हमले में पूर्व मंत्री गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके साथ मौजूद कई कार्यकर्ताओं को भी चोटें आईं। संगठन का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में यह हमला हुआ, लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
प्रदेश सचिव की दो टूक: ‘बेटियां सुरक्षित नहीं’
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे महासभा के प्रदेश सचिव शशिकांत शर्मा ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
”आज उत्तर प्रदेश में महिलाएं और बेटियां पूरी तरह असुरक्षित हैं। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे पूर्व मंत्रियों तक पर हमला करने से नहीं चूक रहे। हम मांग करते हैं कि निशा और शिल्पी के हत्यारों को तत्काल फांसी की सजा दी जाए। यदि सरकार ने हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो संगठन पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगा।”
प्रमुख मांगें: 50 लाख मुआवजा और बर्खास्तगी
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें शासन के सामने रखी हैं:
- कठोर दंड: दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए फांसी की सजा दी जाए।
- आर्थिक सहायता: पीड़ित परिवार को कम से कम 50 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
- सुरक्षा: पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
- पुलिस पर कार्रवाई: घटनास्थल पर मौजूद रहने के बावजूद हमला न रोक पाने वाले लापरवाह पुलिसकर्मियों को तत्काल बर्खास्त किया जाए।
- हमलावरों की गिरफ्तारी: पूर्व मंत्री पर हमला करने वाले ग्राम प्रधान प्रतिनिधि आशुतोष सिंह ‘आशु’ और उसके सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।
विपक्ष का मिला साथ
इस प्रदर्शन में राजनीतिक एकजुटता भी देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष इंजीनियर वीरेंद्र यादव ने भी इस मांग का समर्थन किया। जिलाध्यक्ष जियालाल विश्वकर्मा ने कहा कि यह घटनाएं कानून-व्यवस्था की विफलता का जीता-जागता उदाहरण हैं। न्याय मिलने तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।
भारी संख्या में मौजूद रहे कार्यकर्ता
ज्ञापन सौंपने के दौरान जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस मौके पर मुख्य रूप से मोहम्मद अरशद खान, श्रवण चौधरी, राजेश मौर्य, श्रवण आजाद, शिव दुलारी, राम खेलावन, रामकांत विश्वकर्मा, नरेंद्र शर्मा, अरुण शर्मा, संतोष शर्मा, सत्यम शर्मा, आशीष शर्मा, राम सजीवन शर्मा, फकीरे विश्वकर्मा, जगदेव विश्वकर्मा, आरएस विश्वकर्मा, रामदीन विश्वकर्मा, रामनेवल विश्वकर्मा, अजय शर्मा, विनय शर्मा सहित सैकड़ों की संख्या में पदाधिकारी और समाज के लोग उपस्थित रहे।
