सह- संपादक / सूर्यपाल प्रोटेक
उन्नाव (बीघापुर)। भारत रत्न और भारतीय संविधान के शिल्पकार बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पूरे देश के साथ-साथ उन्नाव जनपद की तहसील बीघापुर के ग्रामीण अंचलों में भी अभूतपूर्व उत्साह और गौरव के साथ मनाई गई। पाटन क्षेत्र के विभिन्न गांवों में आयोजित भव्य कार्यक्रमों ने न केवल बाबा साहेब के प्रति श्रद्धा प्रकट की, बल्कि उनके सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप देने का संकल्प भी दोहराया।
इन कार्यक्रमों में जिला पंचायत प्रत्याशी (पुरवा प्रथम) फारुख शेख और मनीष पटेल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रमों का संयोजन और पर्यवेक्षण संपादकीय सलाहकार सूर्यपाल (प्रोटेक सर) के मार्गदर्शन में गरिमामयी ढंग से संपन्न हुआ।
गांव-गांव गूंजा बाबा साहेब का जयघोष
तहसील बीघापुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम मोहकमगज, लाखमदेमऊ, रसूलपुर, रावतपुर, गढ़कोला, रूप खेड़ा, रामखेड़ा, त्रिपुरपुर, सिजनी और सोहरामऊ में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल रहा। बाबा साहेब की प्रतिमाओं और चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया। नीले झंडों और “जय भीम” के नारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया।
संविधान की प्रस्तावना का ऐतिहासिक वाचन
इस अवसर पर फारुख शेख ने एक अनुकरणीय पहल की। उन्होंने केवल भाषणों तक सीमित न रहकर ग्रामीणों के बीच भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) की सैकड़ों प्रतियां वितरित कराईं। इसके उपरांत, उपस्थित जनसमूह को सामूहिक रूप से प्रस्तावना का वाचन कराया गया।
फारुख शेख ने इस मौके पर कहा, “संविधान की प्रस्तावना केवल शब्द नहीं, बल्कि वह अधिकार और कर्तव्य हैं जो बाबा साहेब ने हमें सौंपे हैं। जब तक गांव का आम नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों को नहीं समझेगा, तब तक सामाजिक न्याय की कल्पना अधूरी है।”
समानता और शिक्षा पर जोर
जनसभाओं को संबोधित करते हुए मनीष पटेल ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन शून्य से शिखर तक पहुंचने की एक गाथा है। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा साहेब ने ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ का जो मंत्र दिया था, वह आज की पीढ़ी के लिए उन्नति का एकमात्र मार्ग है।
मुख्य वक्ता फारुख शेख ने अपने संबोधन में कहा, “बाबा साहेब ने किसी एक जाति या धर्म के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के उद्धार के लिए काम किया। उनका संघर्ष हमें आत्मसम्मान के साथ जीना सिखाता है। आज हम संकल्प लेते हैं कि उनके द्वारा दिखाए गए समानता और बंधुत्व के मार्ग पर चलकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाएंगे।”
संवाद और राष्ट्र निर्माण का आह्वान
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने उपस्थित मातृशक्ति (महिलाओं) और युवाओं से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों को मिटाने और आपसी भाईचारा बढ़ाने पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्र निर्माण का रास्ता गांवों की गलियों से होकर गुजरता है, और जब ग्रामीण भारत संगठित होकर सामाजिक समरसता की बात करेगा, तभी भारत विश्व गुरु बनेगा।
निष्कर्ष और संकल्प
सभी गांवों में आयोजित इन कार्यक्रमों का समापन बाबा साहेब के मिशन को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ। क्षेत्रीय जनता ने फारुख शेख और मनीष पटेल की इस पहल की सराहना की कि उन्होंने राजनीति से ऊपर उठकर वैचारिक चेतना को जगाने का कार्य किया है। इस गौरवमयी अवसर पर भारी संख्या में स्थानीय गणमान्य नागरिक, पंचायत प्रतिनिधि और समाजसेवी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस जयंती उत्सव को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।
