उन्नाव। उत्तर प्रदेश में जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) को लेकर अधिकारियों का लापरवाह रवैया अब पराकाष्ठा पार कर चुका है। ताजा मामला उन्नाव के कृषि विभाग का है, जहाँ अधिकारियों ने एक किसान की समस्या का समाधान करने के बजाय एक अजीबोगरीब और हास्यास्पद ‘आख्या’ (रिपोर्ट) लगाकर पल्ला झाड़ लिया है। ताज्जुब की बात यह है कि दैनिक टाइम्स ऑफ जनसत्ता, सत्यार्थ न्यूज और मॉर्निंग इंडिया टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद आला अधिकारी अब भी कुंभकर्णी नींद में सोए हैं।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित किसान ने अपनी समस्या को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी (संदर्भ संख्या: 92615600009007)। इस शिकायत पर उप निदेशक कृषि विभाग ने जो रिपोर्ट लगाई है, वह पूरी व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है। विभाग ने लिखित जवाब में कहा:
“पोर्टल पर कृषक का डाटा नहीं खुल रहा है… अतः प्रकरण निस्तारित समझा जाए।”
व्यवस्था पर खड़े होते गंभीर सवाल
विभाग की इस रिपोर्ट ने सरकारी कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है:
- तकनीकी खामी या बहानेबाजी: यदि पोर्टल पर डाटा नहीं खुल रहा, तो यह विभाग की तकनीकी कमी है। इसकी सजा किसान को क्यों दी जा रही है?
- बिना समाधान ‘निस्तारण’ कैसे?: बिना समस्या का समाधान किए केवल ‘डाटा न खुलने’ के आधार पर शिकायत को “निस्तारित” (Resolved) कैसे घोषित किया जा सकता है?
- मुख्यमंत्री को गुमराह करने की कोशिश: क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में इसी तरह की खानापूर्ति करके उन्हें जिले के अधिकारी गुमराह कर रहे हैं?
मीडिया की अनदेखी और प्रशासनिक सुस्ती
लगातार कई मीडिया संस्थानों द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के बाद भी जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर संज्ञान लेना उचित नहीं समझा। यह दर्शाता है कि स्थानीय प्रशासन को न तो मीडिया की परवाह है और न ही पीड़ित किसान के हकों की। प्रशासन की यह चुप्पी भ्रष्टाचार और ‘लालफीताशाही’ को बढ़ावा दे रही है।
पीड़ित ने लगाई मुख्यमंत्री से गुहार
अब थक-हारकर पीड़ित किसान ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। किसान का कहना है कि जब जिला स्तर के अधिकारी अपनी तकनीकी खामियों का ठीकरा जनता पर फोड़कर शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डाल रहे हैं, तो अब केवल मुख्यमंत्री ही इस ‘सुस्त’ तंत्र को जगा सकते हैं।
पीड़ित ने मांग की है कि मुख्यमंत्री जी स्वयं इस प्रकरण का संज्ञान लें और उन अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करें जो पोर्टल का बहाना बनाकर सरकारी योजनाओं के लाभ से पात्रों को वंचित रख रहे हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, उन्नाव।
