जिला प्रशासन ने शुरू की निगरानी, तीन किसानों पर लगाया गया जुर्माना
उन्नाव। फसल अवशेष जलाने से बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशानुसार खेतों में पराली जलाना दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। प्रशासन ने जिलेभर में निगरानी बढ़ाते हुए पराली जलाने वालों पर जुर्माना लगाने और आवश्यकतानुसार एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जनपद, तहसील और विकास खंड स्तर पर निगरानी सेल गठित की गई है, जो प्रतिदिन फील्ड स्तर पर निरीक्षण कर रिपोर्ट दे रही है। सैटेलाइट के माध्यम से भी पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी की जा रही है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पराली जलाने की घटना पाए जाने पर संबंधित किसान के विरुद्ध राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम की धारा-24 के अंतर्गत क्षतिपूर्ति की वसूली की जाएगी और धारा-26 के तहत उल्लंघन की पुनरावृत्ति पर अर्थदंड सहित अन्य विधिक कार्रवाई की जाएगी।
अब तक जिले में बेनी पुत्र जालिम निवासी जसरापुर गंजमुरादाबाद, लालता पुत्र भरोसे निवासी ततियापुर बागरमऊ, और रामखेलावन पुत्र दोना निवासी काजीपुर पर जुर्माना लगाया गया है।
प्रशासन ने बताया कि पराली जलाने पर जुर्माने की दर निम्नानुसार निर्धारित की गई है —
- दो एकड़ से कम भूमि वाले किसान : ₹5,000
- दो से पाँच एकड़ तक भूमि वाले किसान : ₹10,000
- पाँच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसान : ₹30,000
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पराली न जलाएं और फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें।
