कवियों ने ओज, श्रृंगार और हास्य रस की कविताओं से श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
पाटन (उन्नाव)। तहसील मुख्यालय के ग्राम शुक्लाखेड़ा स्थित शारदा सदन में हृदयांगन साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था के तत्वावधान में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के समापन अवसर पर शनिवार की रात्रि विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। देशभर से आए कवियों ने गीत, गजल, व्यंग्य और ओज की कविताओं से समां बांध दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन व मां बागेश्वरी की वंदना के साथ हुआ। लखनऊ से आई कवयित्री दिव्या शुक्ला ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत करते हुए कहा—
“बागेश्वरी हो माता अक्षरा हो मां बणी, तुषार हार धवला कमला सरी हो माता।”
इसके बाद ओज के प्रसिद्ध कवि प्रख्यात मिश्रा ने देशभक्ति से ओतप्रोत पंक्तियां सुनाईं—
“सवर्णों से इस पीढ़ी को तपना मैं सिखला दूंगा, नए ट्यूड्स को राधे-राधे जपना मैं सिखला दूंगा।”
उनकी कविता पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।
देहरादून से आई संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष विद्युत प्रभाव चतुर्वेदी ‘मंजू’ ने मातृशक्ति को समर्पित रचना “नमामि मात्रवत्सले” से सबका मन मोह लिया। वहीं डॉ. शारदा प्रसाद दुबे ने कहा—
“मां की सेवा, मां की भक्ति इस दुनिया में सबसे महान, कोई धर्म कोई पंथ नहीं है मां के चरणों के समान।”
कवि अरुण प्रकाश मिश्रा अनुरागी ने श्रृंगार रस में कहा—
“यूं तिरछी निगाहों से देखा न करो तुम, देखना है तो मुस्कुरा कर देखा करो तुम।”
डॉ. सत्य प्रकाश पांडे ‘सत्य’ ने हास्य रस की बौछार कर कहा—
“नख-शिख सौंप दिया हूं खुद को, समझो मिट्टी या सोना, यह अब हाथ में तेरे साथी, आप समझ कर रख लेना।”
बैसवारा के कवि दुष्यंत शुक्ला सिंघनादी ने देशप्रेम का जोश जगाते हुए कहा—
“बुजदिल है वो मानव जिसमें देशप्रेम का ज्वार नहीं, वो कायर है जिसको अपनी मातृभूमि से प्यार नहीं।”
रायबरेली के कवि नीरज पांडे ‘शून्य’ ने कहा—
“अपने पौरुष से वीरों ने इसका भाग्य संवारा है, पानी जिसका लसानी ऐसा उन्नाव हमारा है।”
लखनऊ की कवयित्री रूबी कंचन ने युवतियों पर व्यंग्यात्मक कविता प्रस्तुत की—
“हंसती मुस्कुराती खिलखिलाती युवतियां, इठलाती बलखाती इतराती युवतियां।”
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता प्रख्यात कवि रामेश्वर द्विवेदी ‘प्रलयंकर’ ने की। उन्होंने कहा—
“तिरंगा आज पूरे विश्व भर में प्यार पाता है, क्रांतिकारी मेरा यह ध्वज सभी के मन को भाता है।”
इस अवसर पर सुखदेव पांडे ‘सरल’, विधुभूषण त्रिवेदी, डॉ. नीरज कांत सोती (बिजनौर) सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी।
कार्यक्रम से पूर्व संस्था की ओर से वाणी पुत्रों व विशिष्ट अतिथियों का अंगवस्त्र, प्रतीक चिन्ह व माल्यार्पण कर सम्मान किया गया।
इस दौरान विद्युत प्रभाव चतुर्वेदी ‘मंजू’ की पुस्तक ‘स्वर्ण मंजूषा’ तथा विभूषण विद्या वाचस्पति की पुस्तक ‘शबरी के राम’ का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम का संचालन नीरज पांडे ‘शून्य’ ने किया, जबकि अंत में संस्थापक विधुभूषण त्रिवेदी ने सभी कवियों, अतिथियों और श्रोताओं के प्रति आभार जताया।
