उन्नाव। जिले के दही चौकी क्षेत्र में फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों की बढ़ती संख्या ने स्थानीय लोगों की परेशानियों को बढ़ा दिया है। रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण यह क्षेत्र अब जल और वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक कचरा पास के नालों और खेतों तक पहुंच रहा है, जिससे पानी दूषित हो रहा है और खेती बर्बादी की कगार पर है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई फैक्ट्रियाँ बिना शोधन के रासायनिक अपशिष्ट को सीधे खुली भूमि और जल स्रोतों में छोड़ती हैं। इसी दूषित पानी से खेतों की सिंचाई होने के कारण फसलों की गुणवत्ता गिरती जा रही है। किसानों के मुताबिक उत्पादन कम हो रहा है, जबकि मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती जा रही है।
इसके साथ-साथ फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं व रासायनिक गैसें वायु प्रदूषण को भी तेजी से बढ़ा रही हैं। क्षेत्र में दमा, अस्थमा, फेफड़ों के संक्रमण, त्वचा रोग, एलर्जी और आंखों में जलन जैसे रोग तेजी से फैल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जो हवा साफ और ताजी होती थी, वह आज सांस लेने में तकलीफ पैदा कर रही है।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि कई औद्योगिक इकाइयां प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन नहीं कर रही हैं। शिकायतें देने के बाद भी प्रशासन द्वारा कड़ी कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांग की है कि क्षेत्र की नियमित मॉनिटरिंग कराई जाए, अपशिष्ट निस्तारण संयंत्र की व्यवस्था लागू की जाए और अवैध इकाइयों पर कार्रवाई हो, ताकि लोगों का जीवन और खेती दोनो सुरक्षित रह सकें।
