संवाददाता/मनोज शर्मा
लखनऊ। यूपी दर्शना पार्क में आयोजित चार दिवसीय कौशल लिटरेचर फेस्टिवल 2025 का तीसरा दिन साहित्य, कला और संस्कृति के रंग में सराबोर रहा। 27 से 30 नवंबर तक चलने वाले इस फेस्टिवल का पुस्तक प्रेमियों और कला साधकों को पूरे वर्ष इंतजार रहता है। तीसरे दिन का आकर्षण फिल्मकार मुजफ्फर अली द्वारा ‘उमराव जान’ पर आधारित अपनी नई पुस्तक पर विस्तृत बातचीत रही, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
फेस्टिवल में देशभर के प्रमुख पब्लिशिंग हाउस शामिल हुए, जिनमें बीएफसी पब्लिकेशन और यूनिवर्सल पब्लिकेशन ने अपने लेखकों को सम्मानित किया और बुक शाइनिंग सेरेमनी आयोजित की। इन्हीं आयोजनों के बीच बीएफसी पब्लिकेशन से प्रकाशित डॉ. इंद्र देव के बहुचर्चित कैंपस उपन्यास ‘शबरी और सर्वहारा’ की शाइनिंग सेरेमनी विशेष आकर्षण बना रही।
इस समय यह उपन्यास साहित्य जगत में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कार्यक्रम स्थल पर एक पाठक ने बताया कि उपन्यास वामपंथी राजनीति, ट्रेड यूनियन और अर्बन नक्सलवाद के गठजोड़ को बेहद सटीक रूप में उजागर करता है। उनका कहना था कि मुख्य पात्र मानव मुखर्जी किसी CITU नेता की याद दिलाता है, जबकि शबरी भारतीय मूल्यों और अध्यात्म की प्रतीक के रूप में सामने आती है। पाठक ने बताया कि उपन्यास पढ़कर उन्हें अपने जीवन के संघर्षमय दौर की यादें ताजा हो गईं।
डॉ. इंद्र देव ने लगभग 40 वर्ष विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्य करते हुए बिताए हैं, और उपन्यास की अधिकांश सामग्री उनके अनुभवों पर आधारित है। इसमें दो मजदूर संगठनों—एआई फोफोर्क और एआई मोमर्क—के वैचारिक संघर्ष को दर्शाया गया है। साथ ही वामपंथी प्रोफेसरों द्वारा भारतीय संस्कृति के विरोध, विदेशी फंडिंग, नक्सलवाद को प्रेरित करने और छात्रों में मार्क्सवादी विचारधारा भरने जैसी गतिविधियों को भी विस्तार से दिखाया गया है।
भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण यह तथ्य रहा कि लेखक ने उपन्यास उन वीर जवानों को समर्पित किया है जिन्होंने आंतरिक सुरक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। पुस्तक अब कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध है।
