पाटन, उन्नाव।तहसील बीघापुर और पुरवा क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली लोन नदी आज अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से जूझ रही है। जिन गांवों में कभी इस नदी का मीठा व स्वच्छ जल पीने, स्नान करने और खेती सींचने के काम आता था, वही नदी आज गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है। नदी का पानी इतना प्रदूषित हो गया है कि मछलियाँ तक मरने लगी हैं, और पानी में उठने वाली तेज बदबू व झाग ने स्थिति को और भी भयावह बना दिया है।
बीघापुर, पुरवा व पाटन क्षेत्र के परसंडा, साहबगंज, दैता, भैरमपुर, पोरई, खेसुआ, बिहार-सधनवां खेड़ा, रावतपुर सहित दर्जनों गांवों पर जल प्रदूषण का गंभीर असर पड़ा है। जहाँ कभी किसान इसी नदी के पानी से खेती करते थे, उसकी जगह अब खेत बंजर होकर फसलों की पैदावार घट गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के पानी में बढ़े फ्लोराइड और रासायनिक पदार्थों ने न केवल मिट्टी को खराब कर दिया है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। कई लोग चर्म रोग, जोड़ों का दर्द, दांतों की समस्याएं और पेट संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं।
स्थानीय जानकारों व बुजुर्गों के अनुसार, लोन नदी का उद्गम पवई गांव स्थित पवई ताल से होता है। यह नदी बिछिया ब्लॉक, सिकंदरपुर-करन, पुरवा, बीघापुर व सुमेरपुर होते हुए आगे रायबरेली की ओर बहती है और अंत में डलमऊ क्षेत्र में गंगा नदी में समाहित हो जाती है। वर्षों पहले यह नदी इतनी स्वच्छ थी कि ग्रामीण इसके पानी को पीने तक में इस्तेमाल करते थे। सिंचाई का मुख्य साधन होने के कारण यह नदी गांवों की अर्थव्यवस्था और जीवन का अहम हिस्सा थी।ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो-तीन दशक में चर्म उद्योग, टेनरियों व फैक्ट्रियों से निकलने वाले रसायन और अपरिष्कृत गंदा पानी लोन नदी में गिरता गया, जिससे इसकी हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती गई। नतीजा यह हुआ कि नदी की धारा कमजोर हो गई, पानी काला पड़ने लगा और धीरे-धीरे यह नदी नाले का रूप ले बैठी।
ग्रामीणों ने जल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि नदी और जलग्रहण क्षेत्र की सफाई, प्रदूषण स्रोतों पर रोक, तथा उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट के नियंत्रण के लिए सख्त कार्रवाई की जाए। उनका विश्वास है कि यदि उचित कदम उठाए जाएं तो लोन नदी को फिर से उसके पुराने स्वरूप में लौटाया जा सकता है।क्षेत्रीय किसानों, सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से प्रशासन को ज्ञापन देने की योजना बनाई है, ताकि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता में लिया जा सके। लोगों की उम्मीद है कि सरकार इस पर ध्यान देगी और लोन नदी को पुनर्जीवित करने के ठोस उपाय जल्द करेगी, जिससे क्षेत्र के गांवों को राहत मिल सके।
