उन्नाव। जनपद में तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को उन्नत खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कृषि विभाग सक्रिय है। इसी क्रम में कृषि निदेशक द्वारा बिपिन बिहारी पचोड़्डा सराय (सिकंदरपुर करन) में National Mission on Edible Oils (NMEO) योजना के अंतर्गत उगाई गई सरसों की फसल का स्थलीय निरीक्षण किया गया।
समय पर बुवाई का दिखा असर: फसल में नहीं मिला रोगों का प्रकोप
निरीक्षण के दौरान कृषि निदेशक ने पाया कि 1 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई पीएम-32 (PM-32) प्रजाति की सरसों की स्थिति बेहद संतोषजनक है। इस फसल की बुवाई 1 अक्टूबर को की गई थी। समय से बुवाई होने के कारण फसल की बढ़वार अच्छी है और सबसे खास बात यह रही कि फसल में अब तक पाला या माहू (एफिड) जैसे हानिकारक कीटों और रोगों का कोई असर नहीं देखा गया।
किसानों के लिए सफलता का मंत्र: ‘समय पर बुवाई, बेहतर कमाई’
उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए कृषि निदेशक ने वैज्ञानिक खेती के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि:
- रोगों से बचाव: यदि सरसों की बुवाई समय से (अक्टूबर के प्रथम सप्ताह तक) कर दी जाए, तो ठंड के दौरान पाले का असर न्यूनतम होता है।
- कीट प्रबंधन: समय पर बुवाई करने से माहू कीट का प्रकोप नहीं होता, जिससे कीटनाशकों का खर्च बचता है।
- अधिक उत्पादन: स्वस्थ फसल और कम लागत के चलते किसानों को बाजार में अपनी उपज का बेहतर लाभ मिलता है।
वैज्ञानिक तकनीक की दी गई जानकारी
निरीक्षण के दौरान कृषि अधिकारियों ने किसानों को आधुनिक खेती के गुर सिखाए। किसानों को मुख्य रूप से संतुलित उर्वरक उपयोग, सिंचाई के सही अंतराल, कीट-रोग प्रबंधन और उन्नत बीज प्रजातियों के चयन के बारे में विस्तार से तकनीकी सलाह दी गई।
खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता की ओर कदम
NMEO योजना का मुख्य लक्ष्य देश में खाद्य तेलों के आयात को कम करना और घरेलू उत्पादन को बढ़ाना है। इस तरह के निरीक्षणों और सरकारी प्रोत्साहन से उन्नाव के किसानों में तिलहन की खेती के प्रति उत्साह बढ़ रहा है, जो भविष्य में उनकी आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।
