श्री विजयपुरम (पोर्ट ब्लेयर)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज घोषणा की कि अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह को भारत की ‘ब्लू इकोनॉमी’ (Blue Economy) के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। डॉलीगंज स्थित अटल सेंटर फॉर ओशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर आइलैंड्स (ACOSTI) के दौरे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने द्वीप क्षेत्र में आजीविका और समुद्री तकनीक को बढ़ावा देने वाली कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शुभारंभ किया।
समुद्री संसाधन बनेंगे भारत की आर्थिक शक्ति
वैज्ञानिकों और स्थानीय हितधारकों को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे भारत दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं की ओर बढ़ रहा है, देश का भविष्य समुद्री संसाधनों के सही उपयोग पर निर्भर करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन स्पष्ट है—द्वीप और तटीय क्षेत्रों के विकास के बिना भारत का समग्र विकास संभव नहीं है।
डीप ओशन मिशन: राष्ट्रीय प्राथमिकता
मंत्री ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से दो बार ‘डीप ओशन मिशन’ की घोषणा की, जो समुद्री संपदा को दी गई राष्ट्रीय प्राथमिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अप्रयुक्त रहे समुद्री संसाधन अब रोजगार सृजन, निर्यात और पर्यावरणीय स्थिरता में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
प्रमुख पहलों का शुभारंभ: सीवीड और केज कल्चर
दौरे के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कई अत्याधुनिक समुद्री तकनीकों का प्रदर्शन देखा और उनकी समीक्षा की:
- ओपन-सी केज कल्चर: समुद्री मछलियों के पालन के लिए पायलट प्रोजेक्ट।
- सीवीड फार्मिंग: बड़े पैमाने पर समुद्री शैवाल की खेती, जो जैव-प्रौद्योगिकी के लिए कच्चे माल का काम करेगी।
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: मंत्री ने खुशी जताई कि इन तकनीकों का हस्तांतरण स्थानीय स्तर पर पहले ही शुरू हो चुका है।
बायोE3 नीति और नवाचार
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिसके पास BioE3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) नीति है। उन्होंने कहा कि समुद्री संसाधनों से प्लास्टिक के विकल्प और नई दवाएं तैयार की जा सकती हैं। साथ ही, ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ तकनीक और वैकल्पिक समुद्री पोषण उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार, विशेषकर यूरोप में, बड़ी संभावनाएं हैं।
महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी
केंद्रीय मंत्री ने “वोकल फॉर लोकल” को “लोकल फॉर ग्लोबल” बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं में स्थानीय महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को जोड़ना अनिवार्य है, ताकि द्वीपवासियों की घरेलू आय में वृद्धि हो सके।
इस कार्यक्रम में सांसद श्री बिष्णु पद राय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन और NIOT के वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
