मथुरा। अध्यात्म जगत के सुप्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज अपने सत्संग के माध्यम से लाखों लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में उनके दरबार में एक भावुक पल देखने को मिला, जब एक महिला भक्त ने उत्तराखंड के प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा से जुड़ी अपनी विरह वेदना महाराज जी के समक्ष रखी।
भक्त की जिज्ञासा: ‘काश हम बाबा के सामने बैठ पाते’
सत्संग के दौरान महिला भक्त ने रुआंसे मन से पूछा, “महाराज जी, हम नीम करोली बाबा के अनन्य भक्त हैं। मन में अक्सर यह टीस उठती है कि हमने उनके साक्षात दर्शन नहीं किए। क्या कभी ऐसा संभव हो पाएगा कि हम अपने गुरु के सामने बैठकर अपने मन की बात कह सकें?”
प्रेमानंद महाराज का मार्मिक उत्तर
महिला की व्याकुलता देख प्रेमानंद महाराज ने बड़े ही सहज और आध्यात्मिक भाव से उसे सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि गुरु और शिष्य का संबंध शरीर का नहीं, बल्कि आत्मा का होता है।
महाराज जी के उपदेश की मुख्य बातें:
- हृदय ही गुरु का निवास: गुरु से बात करने के लिए उनके भौतिक शरीर के सम्मुख होना अनिवार्य नहीं है। हमारा हृदय ही गुरुदेव का असली निवास स्थान है।
- अंतर्मन की पुकार: जो बात हमारे हृदय में है, वह उन तक तुरंत पहुँचती है। जैसे एक माँ अपने बच्चे की बिना कही बात समझ लेती है, वैसे ही गुरु भी शिष्य के अंतर्मन को जानते हैं।
- गुरु का मंगल विधान: गुरु की डांट में भी शिष्य का कल्याण छिपा होता है। उनका आशीर्वाद और ‘मंगल विधान’ सदैव अपने भक्तों के साथ रहता है।
कैंची धाम और बाबा का प्रभाव
नीम करोली बाबा, जिन्हें हनुमान जी का अवतार माना जाता है, के भक्तों की संख्या देश-विदेश में करोड़ों में है। उत्तराखंड के कैंची धाम में आज भी भक्त उसी आस्था के साथ पहुँचते हैं जैसे बाबा साक्षात वहां मौजूद हों। प्रेमानंद महाराज की इस व्याख्या ने न केवल उस महिला, बल्कि सोशल मीडिया पर मौजूद लाखों भक्तों को शांति और नई दिशा प्रदान की है।
