पॉली हाउस खेती से किसानों की आय में इजाफा, फूलों की व्यावसायिक खेती को मिला बढ़ावा
इंद्रराज राजपूत
बाराबंकी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बागवानी नीति और केंद्र सरकार की योजनाओं का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। जनपद बाराबंकी में पॉली हाउस तकनीक से जरवेरा फूलों की खेती ने एक किसान की जिंदगी बदल दी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान की है।
विकासखंड रामनगर के ग्राम बेरिया निवासी संदीप वर्मा ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत प्राप्त सरकारी अनुदान का सदुपयोग कर पॉली हाउस में जरवेरा फूलों की खेती शुरू की। संदीप पुत्र राजकुमार वर्मा ने वर्ष 2021-22 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत अपने निजी खेत में 3785 वर्ग मीटर (लगभग 0.38 हेक्टेयर) क्षेत्रफल में पॉली हाउस का निर्माण कराया।
अक्टूबर माह में जरवेरा फूलों की रोपाई की गई और संदीप की मेहनत व वैज्ञानिक देखभाल के चलते मार्च माह से ही उत्पादन शुरू हो गया। फूलों की गुणवत्ता इतनी उत्कृष्ट रही कि लखनऊ मंडी में इसकी जबरदस्त मांग बनी। मात्र तीन महीनों में लगभग 2.5 लाख फूलों का उत्पादन हुआ, जो औसतन 6 से 7 रुपये प्रति फूल की दर से बिके। इससे अब तक किसान को करीब 7.5 लाख रुपये की आय प्राप्त हो चुकी है।
योजना के तहत मिलती है 50 प्रतिशत तक सब्सिडी
इस सफलता का मुख्य आधार एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत मिला सरकारी अनुदान है। योजना के अंतर्गत संदीप वर्मा को 27.51 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ, जिससे पॉली हाउस निर्माण और अन्य आवश्यक खर्च आसानी से पूरे हो सके। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश में किसानों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों से पॉली हाउस खेती को बढ़ावा मिल रहा है और किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
दो से तीन वर्ष तक चलती है जरवेरा की फसल
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जरवेरा की फसल 2 से 3 वर्ष तक लगातार उत्पादन देती है और प्रति वर्ष लाखों रुपये की आमदनी संभव है। पॉली हाउस तकनीक से मौसम का प्रभाव नहीं पड़ता, जिससे साल भर उत्पादन लिया जा सकता है और कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त होता है।
सजावटी फूल है जरवेरा
जरवेरा को अफ्रीकन डेजी या ट्रांसवाल डेजी भी कहा जाता है। यह एक बहुवर्षीय, आकर्षक और रंग-बिरंगा सजावटी फूल है, जिसकी बाजार में कट फ्लावर के रूप में काफी मांग रहती है। पॉली हाउस में नियंत्रित तापमान, नमी और प्रकाश के कारण फूलों की गुणवत्ता बेहतर रहती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं।
अन्य किसानों के लिए बना प्रेरणा स्रोत
जिला उद्यान अधिकारी प्रज्ञा उपाध्याय ने बताया कि अब किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। संदीप वर्मा की सफलता से आसपास के किसान भी प्रेरित हुए हैं और कई लोग पॉली हाउस खेती अपनाने की तैयारी कर रहे हैं।
सरकारी योजनाओं और किसानों की मेहनत के संयुक्त प्रयास से बाराबंकी जैसे जिलों में फूलों की व्यावसायिक खेती तेजी से बढ़ रही है। यह न केवल किसानों की आय में वृद्धि कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रही है। संदीप वर्मा की यह सफलता अन्य किसानों के लिए एक आदर्श मॉडल बनकर सामने आई है।
