ट्रिपल ड्रग थेरेपी से ही मिलेगा हाथीपांव जैसी बीमारी से स्थायी छुटकारा
इंद्रराज राजपूत | बाराबंकी
बाराबंकी। जनपद को फाइलेरिया मुक्त बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत 10 से 28 फरवरी तक चलने वाले आईडीए (ट्रिपल ड्रग थेरेपी) अभियान–2026 को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में गुरुवार को लखनऊ–अयोध्या रोड स्थित रॉयल ऑर्किड में एक मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया के पत्रकारों के साथ स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) एवं पीसीआई (PCI) के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी.के. श्रीवास्तव रहे। वहीं WHO के स्टेट प्रतिनिधि डॉ. नित्यानंद ठाकुर एवं पीसीआई के प्रतिनिधि खालिद ने अभियान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अधिकारियों ने स्वीकार किया कि शासन के निरंतर प्रयासों के बावजूद जनपद में फाइलेरिया के नए मामलों का पूरी तरह उन्मूलन नहीं हो सका है। इसी कारण जिले में विशेष निगरानी रखते हुए सघन अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि बाराबंकी को फाइलेरिया मुक्त घोषित करना है तो प्रत्येक पात्र व्यक्ति को ट्रिपल ड्रग थेरेपी का सेवन करना अनिवार्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस दवा से कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होता और यह अन्य दवाओं के साथ भी सुरक्षित है।
16 लाख से अधिक आबादी को दवा देने का लक्ष्य
जानकारी के अनुसार दरियाबाद, देवा, जाटाबरौली, हरख, रामनगर, सिद्धौर एवं बाराबंकी नगर क्षेत्र की कुल 16 लाख 95 हजार 911 आबादी को ट्रिपल ड्रग थेरेपी देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 1357 टीमें गठित की गई हैं, जिनकी निगरानी के लिए 226 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति दवा से वंचित न रहे।
“हमारा संकल्प – फाइलेरिया से मुक्ति”
कार्यशाला में अभियान का संदेश दोहराया गया— “हमारा संकल्प – फाइलेरिया से मुक्ति”। अधिकारियों ने बताया कि फाइलेरिया मच्छरों से फैलने वाली गंभीर बीमारी है, जिसके लक्षण कई वर्षों बाद दिखाई देते हैं और समय पर इलाज न होने पर यह स्थायी विकलांगता का कारण बन सकती है। उन्मूलन के लिए जरूरी है कि कम से कम 90 प्रतिशत पात्र आबादी दवा का सेवन करे।
पाँच स्तम्भों पर आधारित रणनीति
अधिकारियों ने एलएफआईएमडीए कार्यक्रम की पाँच स्तम्भीय रणनीति की जानकारी देते हुए बताया कि 10 से 28 फरवरी के बीच आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पात्र व्यक्तियों को अपने सामने दवा खिलाएंगी। इस अभियान से दो वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को बाहर रखा गया है।
इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ शिक्षा, पंचायती राज, शहरी एवं ग्रामीण विकास तथा महिला एवं बाल विकास विभाग भी अभियान में सक्रिय सहयोग कर रहे हैं। जनजागरूकता के लिए नुक्कड़ नाटक, पोस्टर-बैनर, दीवार लेखन एवं समुदाय आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से भ्रांतियों को दूर किया जा रहा है।
निगरानी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
अधिकारियों ने बताया कि दवा का सेवन स्वास्थ्यकर्मी के सामने कराया जाएगा और किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव की स्थिति में तुरंत उपचार की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुजाता ने बताया कि जिन घरों में लोग दवा लेने से मना करते हैं, वहां टीमें दोबारा जाकर उन्हें जागरूक करती हैं।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी.के. श्रीवास्तव ने कहा,
“फाइलेरिया दिखाई नहीं देता, लेकिन इसका असर बेहद गंभीर होता है। बीते एक वर्ष से जिले में ट्रिपल ड्रग थेरेपी पर काम किया जा रहा है। समय रहते दवा लेना बेहद जरूरी है।”
उन्होंने आमजन से अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग करने की अपील की, वहीं मीडिया से अपेक्षा जताई कि वह सही एवं वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचाकर अफवाहों को खत्म करे, ताकि बाराबंकी को जल्द से जल्द फाइलेरिया मुक्त बनाया जा सके।
