सह संपादक /सूर्यपाल (प्रोटेक)
पाटन, उन्नाव। तहसील बीघापुर मुख्यालय पाटन क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम सोहरामऊ, सिजनी और मोहकमगंज के बीच स्थित प्राचीन बाबा वनखंडेश्वर धाम में शनिवार को भव्य रुद्राभिषेक एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। धार्मिक आयोजन में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और विधि-विधान के साथ भगवान शिव का अभिषेक कर पूजा-अर्चना की।
करीब 300 वर्ष पुराना बताया जाता है मंदिर
स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा वनखंडेश्वर धाम का इतिहास करीब 300 वर्ष पुराना है। मान्यता है कि प्राचीन समय में इस स्थान पर घना जंगल हुआ करता था। इसी दौरान खुदाई के समय भगवान शिव की मूर्ति प्राप्त हुई थी। जंगल के बीच भगवान शिव की प्रतिमा मिलने के बाद श्रद्धालुओं ने यहां पूजा-अर्चना शुरू की और विधि-विधान के साथ मूर्ति की स्थापना की गई।
घने वन क्षेत्र में भगवान शिव की प्रतिमा मिलने के कारण इस स्थान को वनखंडेश्वर बाबा के नाम से प्रसिद्धि मिली। समय के साथ यहां श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई और परिसर में अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थापित किए गए। आज यह स्थान आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए प्रमुख धार्मिक एवं आस्था का केंद्र बन चुका है।
रुद्राभिषेक में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
आयोजित रुद्राभिषेक में सिजनी, सोहरामऊ, मोहकमगंज सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने भगवान शिव का जल, दूध एवं विभिन्न पूजन सामग्रियों से अभिषेक किया। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान वनखंडेश्वर के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
रुद्राभिषेक के दौरान मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और भोलेनाथ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान शिव की पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया।
रुद्राभिषेक के बाद हुआ विशाल भंडारा
रुद्राभिषेक कार्यक्रम के पूर्ण होने के बाद मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ रास्ते से गुजर रहे राहगीरों ने भी प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में लोगों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया और श्रद्धालुओं को श्रद्धापूर्वक प्रसाद वितरित किया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा वनखंडेश्वर धाम क्षेत्र की पुरानी धार्मिक पहचान है और यहां समय-समय पर धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। ऐसे आयोजनों से ग्रामीण क्षेत्र में धार्मिक एवं सामाजिक एकजुटता को भी बढ़ावा मिलता है।
आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए व्यवस्था बनाए रखने में स्थानीय लोगों ने सहयोग किया। पूरे कार्यक्रम का समापन श्रद्धा, भक्ति और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
