पाटन (उन्नाव): क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुक्रवार को उपजिलाधिकारी (एसडीएम) बीघापुर, रणवीर सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बीघापुर का औचक निरीक्षण किया। इस औचक कार्रवाई से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान जहां स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं की उपलब्धता बेहतर पाई गई, वहीं अस्पताल परिसर में फैली गंदगी को देखकर एसडीएम ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
उपस्थिति और ओपीडी का हाल
शुक्रवार सुबह जब एसडीएम रणवीर सिंह अस्पताल पहुंचे, तो उन्होंने सबसे पहले उपस्थिति पंजिका (अटेंडेंस रजिस्टर) की जांच की। निरीक्षण के समय प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय समेत अस्पताल का अधिकांश स्टाफ अपनी ड्यूटी पर तैनात मिला।
पंजिका के अवलोकन में यह तथ्य सामने आया कि कुल 17 नियमित कर्मचारियों में से लगभग सभी उपस्थित थे। ओपीडी रजिस्टर की जांच करने पर पाया गया कि निरीक्षण के समय तक 11 मरीज अपना पंजीकरण करा चुके थे। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने एसडीएम को अवगत कराया कि वर्तमान में मौसम में हो रहे बदलाव के कारण बुखार, सर्दी-खांसी और सामान्य मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।
मरीजों से सीधा संवाद: दवाओं पर संतोष
एसडीएम ने अस्पताल में उपचार कराने आए मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधा संवाद किया। उन्होंने मरीजों से पूछा कि क्या उन्हें अस्पताल से दवाएं मिल रही हैं या बाहर से खरीदने के लिए पर्चा लिखा जा रहा है।
- संवाद के दौरान एक महिला मरीज ने बताया कि उसे डॉक्टर द्वारा परामर्श के बाद सभी दवाएं अस्पताल के ही काउंटर से प्राप्त हो गईं और उपचार शुरू होने के बाद उसे स्वास्थ्य में सुधार महसूस हो रहा है।
- निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि अस्पताल का स्टॉक पर्याप्त है और किसी भी मरीज ने बाहर से दवा खरीदने की शिकायत नहीं की।
जांच सुविधाएं और एम्बुलेंस की स्थिति
अस्पताल की लैब के निरीक्षण में पाया गया कि वहां मलेरिया, डेंगू और खून की अन्य आवश्यक जांचें सुचारू रूप से की जा रही हैं। किट और रसायनों की कोई कमी नहीं पाई गई। हालांकि, निरीक्षण के दौरान यह बात भी सामने आई कि स्वास्थ्य केंद्र के पास वर्तमान में अपनी कोई स्वतंत्र एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल लाने या रेफर करने के लिए सरकारी हेल्पलाइन 102 और 108 सेवाओं पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
गंदगी देख बिफरे एसडीएम, सफाईकर्मियों को चेतावनी
निरीक्षण के दौरान जहां चिकित्सा सेवाएं बेहतर मिलीं, वहीं साफ-सफाई की व्यवस्था अत्यंत दयनीय पाई गई। एसडीएम रणवीर सिंह ने पाया कि:
- अस्पताल परिसर के कई कोनों में कूड़े के ढेर जमा थे।
- दीवारों पर जाले और धूल जमी हुई थी, जो स्वास्थ्य केंद्र के मानकों के विपरीत थी।
- टॉयलेट और वार्डों के आसपास नियमित सफाई का अभाव दिखा।
गंदगी पर सख्त रुख अपनाते हुए एसडीएम ने सफाई कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि एक अस्पताल, जहां लोग ठीक होने आते हैं, वहां गंदगी का साम्राज्य होना संक्रमण को दावत देने जैसा है। उन्होंने सफाई कर्मियों को कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देश दिए कि अगले 24 घंटों के भीतर परिसर को पूरी तरह स्वच्छ बनाया जाए और इसे नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई: एसडीएम
निरीक्षण के अंत में एसडीएम रणवीर सिंह ने प्रभारी चिकित्साधिकारी को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि सरकार की मंशा हर गरीब और जरूरतमंद को मुफ्त और बेहतर इलाज मुहैया कराना है।
”स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता या मरीजों के प्रति लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दवाओं का वितरण पारदर्शी हो और सफाई व्यवस्था चाक-चौबंद रहनी चाहिए। यदि भविष्य में दोबारा सफाई में कमी मिली, तो संबंधित के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
— रणवीर सिंह, एसडीएम बीघापुर
इस निरीक्षण के बाद स्थानीय नागरिकों में उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में बीघापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं में और सुधार देखने को मिलेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट,
