नई दिल्ली। देशभर में आजादी के अमर गीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में केंद्र सरकार ने “मातरम अभियान” और “हर घर तिरंगा अभियान” को एक साथ मनाने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य देशभक्ति की भावना को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और नागरिकों को राष्ट्रीय एकता के सूत्र में बांधना है।

यह संयुक्त अभियान न सिर्फ़ बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की कालजयी रचना “वंदे मातरम” को श्रद्धांजलि देता है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत की प्रेरक भूमिका को भी रेखांकित करता है। आयोजनों के माध्यम से वंदे मातरम की भावना को आज के भारत के संदर्भ में नए सिरे से प्रस्तुत किया जा रहा है — जो देश के गौरवशाली अतीत को उसके एकजुट, आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भविष्य की आकांक्षाओं से जोड़ता है।
सरकार का मानना है कि इन अभियानों से युवाओं में राष्ट्रप्रेम की भावना सुदृढ़ होगी और उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान तथा संघर्ष से जोड़ने का अवसर मिलेगा। देशभर में शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सामाजिक संगठनों द्वारा तिरंगा रैली, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।
निष्कर्ष:
वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का यह उत्सव भारत की राष्ट्रीय पहचान के विकास में इस गीत के गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करता है। उन्नीसवीं सदी के साहित्यिक वातावरण से उपजा वंदे मातरम अपने समय की सीमाओं से आगे बढ़कर उपनिवेशवाद विरोधी प्रतिरोध और सामूहिक चेतना का प्रतीक बन गया। यह आयोजन न केवल बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के विज़न की स्थायी प्रासंगिकता को दोहराता है, बल्कि आधुनिक भारत में राष्ट्रवाद, एकता और सांस्कृतिक आत्म-जागरूकता के नए आयाम भी खोलता है।
