जम्मू-कश्मीर । किश्तवाड़ जिले के डोलगाम क्षेत्र में शनिवार सुबह सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच एक बार फिर मुठभेड़ की खबर सामने आई है। लंबे समय से चल रहे ऑपरेशन त्राशी-I के तहत सुरक्षाबलों ने छिपे आतंकियों के साथ दोबारा संपर्क स्थापित किया है। यह अभियान लगातार 14वें दिन भी जारी है।
इस संयुक्त कार्रवाई में भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के जवान शामिल हैं। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को चारों ओर से घेर लिया है और आतंकियों के भागने के सभी संभावित रास्तों पर नजर रखी जा रही है। मौके पर रुक-रुक कर गोलीबारी हो रही है।
विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में तलाशी अभियान को और तेज कर दिया है। बताया जा रहा है कि किश्तवाड़ क्षेत्र में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े तीन आतंकियों की तलाश की जा रही है। बीते दो हफ्तों में यह चौथी बार है जब इस इलाके में मुठभेड़ की स्थिति बनी है।
ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने किश्तवाड़ का दौरा कर जमीनी हालात और आतंकवाद-रोधी रणनीति की समीक्षा की। उनका उद्देश्य क्षेत्र में सक्रिय आतंकियों को पूरी तरह निष्क्रिय करना है।
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने एहतियातन चतरू और डोलगाम समेत आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं। सिंगपुरा, अरिगम, द्वाथर और नैदगाम जैसे क्षेत्रों में संचार सेवाएं प्रभावित हैं। अधिकारियों के अनुसार यह कदम अफवाहों और गलत सूचनाओं को फैलने से रोकने के लिए उठाया गया है।
यह अभियान 18 जनवरी को बर्फीले और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में शुरू किया गया था। भारी बर्फबारी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। शुरुआती मुठभेड़ में एक जवान शहीद हुआ था, जबकि कुछ अन्य सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे।
बीते दिनों माली दाना टॉप और जंसीर-कंडीवार क्षेत्रों में भी आतंकियों से आमना-सामना हुआ था, हालांकि घने जंगल और बर्फ का फायदा उठाकर वे फरार होने में सफल रहे थे। फिलहाल सुरक्षाबल पूरी सतर्कता के साथ अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं और आतंकियों पर शिकंजा कसने की कोशिश जारी है।
